मिर्जापुर स्थित विंध्याचल मंदिर में दान में मिले गहनों की आज तक जांच नहीं हुई। दान में मिली पीली और सफेद धातु का पिछली बार कब ऑडिट हुआ, इसकी जानकारी भी प्रशासन के पास नहीं है।
विंध्याचल मंदिर में दान में मिले सोने और चांदी के गहनों की आज तक जांच नहीं हुई। इसका कोई हिसाब भी नहीं है। यहां दान पात्रों से निकले आभूषणों को रजिस्टर में केवल पीली और सफेद धातु लिखा जाता है। दान पात्र से मिले गहनों को प्रशासन इसी रूप में आज तक दर्ज करता चला आ रहा है।
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न तो इन गहनों की जांच कराई गई है और न ही इनके संबंध में जानकारी सार्वजनिक की गई है। दान में मिली पीली और सफेद धातु का पिछली बार कब ऑडिट हुआ, इसकी जानकारी भी प्रशासन के पास नहीं है।
अयोध्या में राम मंदिर की तरह विंध्याचल स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर, मां अष्टभुजा मंदिर और मां कालीखोह मंदिर में हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन पूजन के लिए आते हैं। यहां लगे 22 दान पात्रों में भक्त अपनी श्रद्धानुसार धनराशि और आभूषण डालते हैं।
हर तीन महीने में होने वाली गणना में दान में मिले रुपयों की जानकारी तो साझा की जाती है, लेकिन गहनों के रूप में क्या मिला हुआ, यह सार्वजनिक नहीं किया जाता। इतना ही नहीं, दान पात्र में मिले आभूषणों को पीली और सफेद धातु के रूप में दर्ज कर बॉक्स में रखकर लॉकर में सुरक्षित रखने का दावा प्रशासनिक अधिकारी करते रहे हैं। आज तक इन गहनों की जांच नहीं कराई गई है। ऐसे में व्यवस्था के पारदर्शी होने पर सवाल खड़े होते हैं।
दान पात्र में मिलने वाले आभूषण की जानकारी पंडा समाज के पदाधिकारियों को भी नहीं दी जाती। गिनती सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होती है पर इसे और पारदर्शी बनाने की जरूरत है। पंकज द्विवेदी, अध्यक्ष, श्री विंध्य पंडा समाज।
दानपात्र से जो भी रुपये निकलते हैं उनकी पारदर्शिता से गणना कराई जाती है। दान में जो भी आभूषण मिलते हैं उसे बैंक के डबल लॉकर में रखवाया जाता है। पवन कुमार गंगवार, जिलाधिकारी, मिर्जापुर
दान पात्र से निकले धन की गिनती प्रशासनिक कर्मी करते हैं। हम लोग मानकर चल रहे हैं कि दान पात्र से निकला चंदा सुरक्षित ही होगा। भानु पाठक, मंत्री, श्री विंध्य पंडा समाज।
10 साल पहले दान के रुपये की चोरी में दर्ज हो चुकी है चार पर प्राथमिकी
जनवरी 2016 में मां विंध्याचल मंदिर में दान में मिले रुपये की गिनती के दौरान एक हजार रुपये के 77 नोट चोरी हो गए थे। नायब तहसीलदार की तहरीर पर चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इनमें विंध्य विकास परिषद के दो लिपिक और दो तीर्थ पुरोहित शामिल थे। तत्कालीन आरोपियों में से एक व्यक्ति आज भी दान के पैसों की गिनती में शामिल होता है।