10 साल पहले दान के पैसों की चोरी में दर्ज हो चुकी है चार पर प्राथमिकी
जनवरी 2016 में मां विंध्यवासिनी मंदिर में दान में मिले पैसों की गिनती के दौरान एक हजार रुपये के 77 नोट चोरी हो गए थे। नायब तहसीलदार की तहरीर पर चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इनमें विंध्य विकास परिषद के दो लिपिक और दो तीर्थ पुरोहित शामिल थे। तत्कालीन आरोपियों में से एक व्यक्ति आज दान के पैसों की गिनती में शामिल होता आ रहा है।
मेरे कार्यकाल में एक हार और एक किलो चांदी चढ़ी: सिटी मजिस्ट्रेट
सिटी मजिस्ट्रेट अविनाश कुमार ने बताया कि मेरे कार्यकाल में एक किलो चांदी और एक हार चढ़ाया गया था। इसे लॉकर में सुरक्षित रखवा दिया था। दान पात्र से जो भी आभूषण प्राप्त होते हैं, उनको डबल लॉकर में रखा जाता है। उसकी दो चाबियां होती हैं। दान पात्र के रुपयों की पूरी गिनती सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती है। गिनती में केवल प्रशासनिक कर्मी ही शामिल होते हैं। किसी भी बाहरी व्यक्ति को शामिल नहीं किया जाता। आभूषणों की जांच और ऑडिट से संबंधित किसी जानकारी देने से उन्होंने इन्कार किया।
विंध्यवासिनी मंदिर में होती है गिनती, अष्टभुजा और कालीखोह से लाया जाता है दान का रुपया
मां विंध्यवासिनी, कालीखोह और अष्टभुजा मंदिरों के दान पात्रों में प्राप्त धनराशि की गिनती विंध्यवासिनी मंदिर में होती है। कालीखोह और अष्टभुजा से धनराशि विंध्यवासिनी मंदिर लाई जाती है। वहां से धनराशि को विंध्यवासिनी मंदिर तक लाने के लिए किसी विशेष नियम का उल्लेख नहीं है। इसके बाद मंदिर के ऊपर बने कमरे में गिनती की जाती है। हाल ही में दान पात्र में लगी आग के बाद हुई गिनती प्रशासनिक भवन में की गई थी। पंडा समाज के पदाधिकारियों का दावा है कि वर्ष 1982-83 से स्टॉक बुक रजिस्टर मेंटेन किया जाता है लेकिन इसे कभी सार्वजनिक नहीं किया गया। इसी प्रकार दान की रसीद से प्राप्त होने वाली धनराशि की जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की जाती।
दान पात्र में मिलने वाले आभूषण की जानकारी पंडा समाज के पदाधिकारियों को भी नहीं दी जाती। गिनती सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होती है पर इसे और पारदर्शी बनाने की जरूरत है। -पंकज द्विवेदी, अध्यक्ष, श्री विंध्य पंडा समाज
नौ साल से चुनाव नहीं कराया जा रहा है। हर दो साल पर चुनाव का नियम है। जब चुनाव ही नहीं हो रहा है तो पारदर्शिता कैसे आएगी। पहले पार्षदों की देखरेख में चढ़ावे की गिनती होती थी। अब सब मनमानी हो रही है। -राजन पाठक, पूर्व अध्यक्ष, श्री विंध्य पंडा समाज
दान पात्र से निकले धन की गिनती प्रशासनिक कर्मी करते हैं। हम लोग मानकर चल रहे हैं कि दान पात्र से निकला चंदा सुरक्षित ही होगा। -भानु पाठक, मंत्री, श्री विंध्य पंडा समाज