भूगर्भ पानी के अनायास दोहन से जलस्तर लगातार घटता जा रहा है। पिछले कई साल से अच्छी बारिश न होने और पानी की बर्बादी ने अब इस ओर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। वैसे तो हर साल गर्मी के सीजन में पानी की किल्लत होती थी लेकिन इस साल अप्रैल में ही पेयजल के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है। अभी जेठ की गर्मी अभी बाकी है। हर घर बोरिंग और सबमर्सिबल के अधिक इस्तेमाल से भी यह समस्या पैदा हुई है।
जिले में इस समय लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। हर क्षेत्र में पानी की भारी कमी होती जा रही है। लोगों को पानी मुहैया कराने के लिए मंथन शुरू कर दिया गया है, लेकिन अभी तक कामयाबी नहीं मिली है। जिले में 4300 हैंडपंप है, जिसमें 3700 हैंडपंपों ने पानी छोड़ दिया है। इसके अलावा 2288 तालाब हैं, जिसमें से मात्र 1144 ही भरे हैं। इन्हें भरने की कवायद सरकारी रफ्तार से चल रही है।
जब तक भरे जाएंगे, हो सकता है बारिश आ जाए। करीब 3000 से अधिक सबमर्सिबल व ट्यूबवेल हैं। जिसमें आधे खराब है। इससे पानी की घोर समस्या उपन्न हो गई है। पानी मुहैया कराने के लिए इतनी सुविधा देने के बावजूद आज जनपद के मड़िहान, लालगंज, हलिया, पहाड़ी, जमालपुर, अहरौरा, छानबे समेत अन्य इलाके में लोग एक एक बूंद पानी के लिए परेशान हैं। पानी का महत्व जब तक हर आदमी नहीं समझेगा, और भयावह स्थिति का सामना करना पड़ेगा।