मिर्जापुर। कोविड- 19 के चलते इस बार मोहर्रम का पर्व भी सार्वजनिक रूप से नहीं मनाया जाएगा। प्रशासन के आग्रह पर मु्िस्लम बंधुओं ने त्योहार घर से ही मनाने का निर्णय लिया है।
मोहर्रम का पर्व शोक का पर्व है। दसवीं मोहर्रम पर जिले में बड़े पैमाने पर ताजिए उठाए जाते हैं और उनको कर्बला में ठंडा किया जाता है। इमाम चौक पर ताजिया रखने का सिलसिला मोहर्रम की एक तारीख से ही शुरू हो जाता है। वहां पर फने सिपहगीरी के साथ लोग विभिन्न करतब बाजी भी करते थे। साथ ही ताजिए के रास्ते में शीतल जल व लंगर भी तकसीम किया जाता था लेकिन इस बार यह सब कुछ नहीं होगा। इस बार दसवीं मोहर्रम 30 अगस्त को पड़ रही है। जिला प्रशासन ने पहले से ही धर्म गुरुओं के साथ बैठक कर उनको आगाह कर दिया है कि कोविड- 19 के चलते इस प्रकार के सार्वजनिक आयोजन खतरनाक हो सकते हैं। मुस्लिम बंधुओं ने भी मामले की गंभीरता को समझते हुए मोहर्रम को घर से ही मनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए मजलिस व अन्य शोक के कार्यक्रम घर में ही आयोजित किया जाएगा।