यदुनाथ सिंह की ही देन है कि रामनगर के पीपा पुल से गुजरने वालों को कोई पथकर नहीं देना पड़ता है। इसके लिए उन्होंने वर्ष 1972-73 में बीएचयू के छात्रों की टोली बनाई और संघर्ष छेड़ दिया था। रामनगर में लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा के पास सत्याग्रह किया था। तत्कालीन काशी नरेश डा. विभूति नारायण सिंह ने डीएम बनारस और यदुनाथ सिंह के बीच वार्ता करा कर समस्या का समाधान कराया।
इसी तरह प्रभुनारायण सिंह राजकीय इंटर कॉलेज रामनगर और आदित्य नारायण सिंह राजकीय इंटर कॉलेज चकिया के छात्रों की फीस माफी के लिए भी उन्होंने आंदोलन किया। वर्ष 1974 में पहली बार मुगलसराय विधान सभा से निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और लोकदल के प्रत्याशी गंजी प्रसाद से मात्र 427 वोटों से पराजित हुए। वर्ष 1980 में यदुनाथ सिंह अपने गृह क्षेत्र चुनार से लोकदल के टिकट चुनाव लड़े और ओमप्रकाश सिंह और शिवदास तिवारी की जमानत जब्त करा दी। वर्ष 1985,1989, 1991 और 1993 से चुनार में लगातार जीत का परचम फहराते रहे।
पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह और एचडी देवगौड़ा ने इनके लिए चुनाव प्रचार करते हुए इन्हें दूसरा राजनारायण कहा था। चुनार की जनता फक्खड़ विधायक के नाम से पुकारती थी। इन्होंने अपने विधानसभा कार्यकाल में कई नहरों की खुदाई कराई, गड़ई और कलकलिया नदी पर पुलों का निर्माण कराया। चुनाव लड़ने के लिए धन नहीं था तो क्षेत्रीय जनता ने खुद धन जुटाकर उनका चुनाव संचालन किया। लोगों ने चंदा एकत्र कर चुनाव लड़ाया था। चुनार की जनता इन्हें जन जन का नेता भी कह कर पुकारती थी।