शोहरत ऐसी कि बॉलीवुड के पृथ्वीराज कपूर और सुनील दत्त सरीखे सितारे भी यहां के राम को नमन करने पहुंचे। नगर की श्री त्रिमोहानी रामलीला कमेटी ने 1895 से लीला शुरू की थी, जिसकी ख्याति दूर-दूर तक है। लीला पहले त्रिमोहानी से सटे दाऊजी घाट पर पेट्रोमैक्स की रोशनी में होती थी। केसरिया बाना पहने स्वरूपों की छवि घाट पर देखते ही बनती थी।
मगर 1952 से इसे त्रिमोहानी पार्क में कराया जाने लगा। जगह बदली लेकिन परंपराएं नहीं बदली गईं। यहां भी पेट्रोमैक्स की रोशनी में ही लीला होती थी चार साल पहले कमेटी ने धारावाहिक रामायण की कड़ियां पर्दे पर दिखाई गईं लेकिन लोगों ने जीवंत लीला की जगह उसे तरजीह नहीं दी।
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अगले साल से फिर लीला होने लगी। रोजाना दो-ढाई घंटे प्रसंग होते हैं। इसके लिए स्थानीय निवासियों में से ही स्वरूपों का चयन होता त्रिमोहानी की लीला की प्रसिद्धि का आलम यह है कि पृथ्वीराज कपूर 1964 में यहां आए तो खुद को लीला देखने से नहीं रोक सके। उसके बाद 1972 में सुनील दत्त ने लीला का आनंद लिया। लीला में हास्य या नृत्य को शामिल नहीं किया जाता है। लीला एक से नौ अक्तूबर तक होगी।
हीरालाल सिंहानियां एवं आशीष धवन लीला के प्रमुख स्वरूपों को अभ्यास करा रहे हैं। 11 अक्तूबर को विजयादशमी, 21 को भरत मिलाप होगा और देवोत्थान एकादशी पर राज्याभिषेक होगा। अध्यक्ष ओमप्रकाश चौरसिया, मंत्री राजेश जोशी तैयारी में जुटे हैं।