-नोटों की माला बनाने वाले कारीगरों का मोह हो रहा भंग, व्यावसाय प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। लग्न का सीजन शुरू होते ही महंगाई ने परिजनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। शादियों में बजट बढ़ने का असर केवल खान-पान, सजावट ही नहीं बल्कि दूल्हे की शान कही जाने वाली नोटों की माला पर भी पड़ी है। बाजार में नये नोटों की किल्लत से पिछले सहालग के मुकाबले इस बार 40 फीसदी तक ऑर्डर गिरा है। लोग शगुन के तौर पर नोटों की छोटी मालाएं ही बनवाकर काम चला रहे हैं। इससे पेशे से जुड़े कई व्यावसायियों के व्यापार प्रभावित हो रहे हैं। कई व्यापारी धंधा बंद करने पर विचार कर रहे हैं।
एक समय घर की महिलाओं से लेकर रिश्तेदारी से आई महिलाओं की ओर से आंगन में बैठे दूल्हे को नोटों की माला पहनाने की परंपरा रही थी। धीरे-धीरे यह विलुप्त होती जा रही है। नये नोटों की किल्लत के चलते से पेशे से जुड़े परेशान हैं। नये नोट उपलब्ध कराने के बावजूद कारीगरों को माला के लिए बाजार में 100 रुपये के 100 नोट की माला के लिए 300 रुपये, 10 रुपये के 100 नोट की माला के लिए 350 रुपये, 50 रुपये नोट की माला के लिए कारीगरों को 300 रुपये अतिरिक्त पारिश्रमिक देना पड़ रहा है। यदि नई करेंसी नहीं दे रही तो उसके लिए भी अतिरिक्त कमीशन देना पड़ता है।
वर्जन
बाजार में नये नोटों की किल्लत से पिछले साल के मुकाबले इस बार ऑर्डर में 30 से 40 फीसदी की गिरावट आई है। लोग शगुन के तौर पर नोटों की छोटी मालाएं ही बनवाकर काम चला रहे हैं।
-महेंद्र।
किसी माला में सौ रुपये के सौ नोट लगे हैं तो तीन से चार सौ रुपये में बिक रहा है। यही वजह है कि इन मालाओं की बिक्री में पहले की अपेक्षा कमी आई है।
-राजेंद्र कुमार।
पहले नये नोटों की माला का विशेष प्रचलन रहा। धीरे-धीरे इस तरफ लोगों का रुझान कम हो रहा है। नये नोट की किल्लत के चलते पहले जैसा ऑर्डर भी नहीं मिल रहा है। किसी-किसी लगन में दो, चार आर्डर मिल जा रहे हैं।
-संतोष कुमार।
पहले दुकान पर नोटों से बनीं माला की बिक्री हो जाती थी। बनाने के बावजूद दुकानों पर नोटों से बनीं माला पड़ी रहती है। घाटे के कारण लोग पेश से दूरी बना रहे हैं।
-गणेश पटवा।