नगर के चौबे टोला स्थित श्रीरामटेक पर चल रहे श्रीमद् भागवत महापुराण अमृत संजीवनी कथा के सातवें दिन व्यास पीठ से पं. नारायण दास जी महाराज ने भक्तिरस की बयार बहाई।
महाराज जी ने कहा कि भागवत कथा मनोरंजन नहीं मनोमंथन के लिए है। संतोष ही परम धन है, जिसके मन में मोह बसा है, वह दरिद्र है। मित्रता कैसी होनी चाहिए श्रीकृष्ण ने यह सीख दिया।
सुदामा एक चरित्र नहीं बल्कि मित्र धर्म का पालन करने का सबक सिखाने वाला अध्याय है। उन्होंने कहा कि सुदामा निष्काम भाव के प्रतीक हैं, जिन्होंने द्वारकाधीश के सामने होने के बाद भी अपने लिए कुछ नहीं मांगा। महाराज जी ने कहा कि इंसान देता है तो गाता है, ईश्वर देता है तो छिपाता है।
श्रीमद् भागवत कथा जीवन को सार्थक करने का साधन है। भागवत कथा के श्रवण से इहलोक सहित परलोक सुधरने के साथ ही सात पीढ़ी का उद्धार होता है। संगीतमय कथा के दौरान अमरनाथ शुक्ल और अजीत ने अपने मधुर भजन-मुकुट सिर मोर का मेरे चित चोर का..सहित कई भजनाें को प्रस्तुत कर भक्ताें को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मधुर भजनों के दौरान आर्गन पर ओमप्रकाश दूबे उर्फ मिंटू, नाल पर पंचम मास्टर, पैड पर पप्पू ने कुशल संगत किया। वैदिक मंत्रोच्चार बीच देवी का पूजन-अर्चन अवधेश कृष्ण शास्त्री के निर्देशानुसार यजमान शिवशंकर सोनी एवं रमाशंकर सोनी ने किया।