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Mirzapur: अब तोप से दुश्मनों के छक्के छुड़ाएगी मिर्जापुर की लेफ्टिनेंट साक्षी, जानें- संघर्ष की कहानी

Mon, 08 May 2023 09:56 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मिर्जापुर

सार

मिर्जापुर जिले में देहात कोतवाली क्षेत्र के छोटे से गांव कुरकुठिया निवासी मेजर दिनेश कुमार दुबे की 22 वर्षीय पुत्री साक्षी दुबे की इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई आर्मी पब्लिक स्कूल पुणे में हुई। वर्ष 2018 में इंटर पास होने के बाद साक्षी ने पुणे के फर्ग्यूसन काॅलेज से इतिहास से स्नातक की शिक्षा ली। पिता मेजर हैं और माता संध्या गृहिणी हैं। साक्षी ने पहले से ही तय कर लिया था कि वे पिता की तरह ही आर्मी ज्वाइन कर देश सेवा करेंगी।
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पासिंग आउट परेड में लेफ्टिनेंट साक्षी दुबे को रैंक लगाते उनके पिता मेजर दिनेश दुबे माता संध्या दुबे। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अब मिर्जापुर की लेफ्टिनेंट बिटिया तोप से दुश्मनों के छक्के छुड़ाएगी। पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनीं साक्षी ने एक और उपलब्धि हासिल की है। साक्षी दुबे भारतीय सेना के तोपखाना (आर्टिलरी) रेजिमेंट में पहली बार शामिल हुईं पांच महिला अधिकारियों में से एक हैं। देश के विभिन्न राज्यों से पांच महिला अधिकारियों महक सैनी, अदिति यादव, पवित्र मुदगिल और आकांक्षा को रेजिमेंट में शामिल किया गया है। मिर्जापुर की साक्षी उत्तर प्रदेश की पहली महिला हैं, जो इस रेजिमेंट में शामिल हुई हैं।

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यह भी पढ़ें- वाह क्या बात है!: मिर्जापुर के इस शख्स ने चांद पर खरीदी एक एकड़ जमीन, बताया कैसे और कहां करवाई रजिस्ट्री?

मिर्जापुर जिले में देहात कोतवाली क्षेत्र के छोटे से गांव कुरकुठिया निवासी मेजर दिनेश कुमार दुबे की 22 वर्षीय पुत्री साक्षी दुबे की इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई आर्मी पब्लिक स्कूल पुणे में हुई। वर्ष 2018 में इंटर पास होने के बाद साक्षी ने पुणे के फर्ग्यूसन काॅलेज से इतिहास से स्नातक की शिक्षा ली। पिता मेजर हैं और माता संध्या गृहिणी हैं। साक्षी ने पहले से ही तय कर लिया था कि वे पिता की तरह ही आर्मी ज्वाइन कर देश सेवा करेंगी।

वर्ष 2020 में साक्षी ने आर्मी में जाने के लिए तैयारी शुरू कर दी। ग्रेजुएशन के दौरान साक्षी एनसीसी भी करती रहीं। वर्ष 2022 में कम्बाइंड डिफेंस सर्विसेज (सीडीएस) की परीक्षा पास की। सर्विस सेलेक्शन बोर्ड में चले कठिन इंटरव्यू के बाद आर्मी में लेफ्टिनेंट के लिए साक्षी का चयन हुआ। इसके बाद साक्षी ने चेन्नई में ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में 11 महीने का कठिन प्रशिक्षण लिया।

 

लेफ्टिनेंट साक्षी दुबे - फोटो : अमर उजाला

साक्षी के प्रशिक्षण तक तोपखाना (आर्टिलरी) रेजिमेंट में महिला अधिकारियों की तैनाती नहीं थी। जनवरी में सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडेय ने महिला अधिकारियों को शामिल करने की घोषणा की। तोपखाना रेजिमेंट में महिला अधिकारियों को शामिल करने की तैयारी चल रही थी। इस बीच साक्षी ने प्रशिक्षण में बेहतर रैंक प्राप्त किया, इसलिए उनको तोपखाना रेजिमेंट में शामिल किया गया।

चेन्नई के आफिसर्स ट्रेंनिग एकेडमी में लेफ्टिनेंट की ट्रेनिंग लेने के बाद साक्षी की बेहतर रैंकिंग को देखते हुए उन्हें देश के तोपखाना रेजिमेंट में शामिल किया गया। पांच महिला अधिकारियों में दो की तैनाती पाकिस्तान और तीन की चीन बार्डर पर चुनौतीपूर्ण स्थान पर हुई है।

खेल व संगीत से है लगाव

साक्षी को सैन्य गतिविधियों के अलावा खेल व संगीत से भी लगाव है। खेलों में साक्षी को हैंडबाल, बास्केटबाल, स्क्वॉश में रुचि है। गाने सुनना और गुनगुनाना दोनों पसंद है।

पिता को मानती है प्रेरणा स्रोत

साक्षी दुबे के पिता दिनेश कुुमार दुबे मेजर हैं। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई कुरकुठिया गांव के पास खरहरा प्राथमिक विद्यालय से की थी। इस समय वे सागर मध्य प्रदेश में तैनात हैं। साक्षी बचपन से पिता को आर्मी की वर्दी में देखते हुए बड़ी हुई हैं। साक्षी ने बताया कि उनके पिता उनके आदर्श और प्रेरणास्रोत हैं। उनकी ही प्रेरणा से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। मां संध्या ने भी उनको सपोर्ट किया। उनका छोटा भाई साहस दुबे अभी फर्गुसन काॅलेज से पढ़ाई कर रहा है। वह एयरफोर्स में जाने की तैयारी कर रहा है।
 

यूपीएससी सीडीएस - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
एयरफोर्स की भी लिखित परीक्षा कर चुकी हैं पास

साक्षी ने बताया कि मार्च 2022 में उनका सेलेक्शन आर्मी के लिए हो गया था। उन्होंने बताया कि आर्मी की कंबाइंड डिफेंस सर्विस (सीडीएस) की परीक्षा देने के बाद एयरफोर्स के लिए लिखित परीक्षा पास की थीं। तब तक आर्मी का रिजल्ट आ गया। साक्षी ने बताया कि उनको आर्मी में ही जाना था। एयरफोर्स की परीक्षा इसलिए दी थीं कि उन्हें यह देखना था कि उसमें किस तरह की तैयारी होती है।

गांव आने पर हुआ स्वागत, लोगों ने जताई खुशी

लेफ्टिनेंट बनने पर 29 अप्रैल को पासिंग आउट परेड होने के बाद साक्षी को तोपखाना रेजिमेंट में पांच महिला अधिकारियों के साथ शामिल किया गया। साक्षी अभी छुट्टी पर अपने गांव आई हैं। यहां से जाने के बाद वे तोपखाना रेजिमेंट ज्वाइन करेंगी। गांव आने पर साक्षी का लोगों ने स्वागत किया। उनके दादा सेवानिवृत्त लेखपाल माता अंबर दुबे का तो खुशी का ठिकाना नहीं है। साक्षी के पिता दिनेश के साथी विंग कमांडर संतोष दुबे ने अपने बबुआ पोखरा स्थित आवास पर साक्षी का स्वागत किया। संतोष की माता कमला देवी ने आरती कर मिठाई खिलाकर साक्षी के बेहतर भविष्य की कामना की। इस दौरान साक्षी की माता संध्या दुबे, संतोष दुबे, विदुषी दुबे आदि मौजूद रहीं।
 
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सीडीएस : चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
शांत रहिए और कीजिए कठिन परिश्रम

साक्षी ने बताया कि कठिन परिश्रम के बल पर आप हर मुकाम हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को कठिन परिश्रम से नहीं भागना चाहिए। कठिन परिश्रम करने के साथ उनको शांत रहना चाहिए। ताकि लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रहे। कहा कि आर्मी ऐसा क्षेत्र है, जहां सबको मौका मिलता है। आर्मी में आकर देश सेवा से सीधे जुड़ा जा सकता है। यहां आपका व्यक्तित्व व चरित्र निखरता है। कांफिडेंस लेवल बढ़ता है।

इंटर के बाद एनडीए और ग्रेजुएशन के बाद सीडीएस की दे सकते हैं परीक्षा

साक्षी ने देश सेवा के लिए जल-थल-नभ तीनों सेनाओं में अधिकारी बनने के लिए बताया कि युवा इंटर पास करने के बाद एनडीए (नेशनल डिफेंस एकेडमी) की परीक्षा दे सकते हैं। लिखिल परीक्षा पास करने के बाद सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) द्वारा पांच दिन तक साक्षात्कार होता है। तब जाकर सेलेक्शन होता है। स्नातक करने वाले लोगों को कंबाइंड डिफेंस सर्विस (सीडीएस) की परीक्षा देनी होती है। अगर स्नातक में एनसीसी का प्रमाण पत्र प्राप्त किया है तो लिखित परीक्षा न देकर सीधे एसएसबी द्वारा साक्षात्कार होता है। जिसमें काफी कम सीटें होती हैं। इसमें एक सीटी शहीद परिवार के लिए आरक्षित होती है।
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