लेफ्टिनेंट साक्षी दुबे
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साक्षी के प्रशिक्षण तक तोपखाना (आर्टिलरी) रेजिमेंट में महिला अधिकारियों की तैनाती नहीं थी। जनवरी में सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडेय ने महिला अधिकारियों को शामिल करने की घोषणा की। तोपखाना रेजिमेंट में महिला अधिकारियों को शामिल करने की तैयारी चल रही थी। इस बीच साक्षी ने प्रशिक्षण में बेहतर रैंक प्राप्त किया, इसलिए उनको तोपखाना रेजिमेंट में शामिल किया गया।
चेन्नई के आफिसर्स ट्रेंनिग एकेडमी में लेफ्टिनेंट की ट्रेनिंग लेने के बाद साक्षी की बेहतर रैंकिंग को देखते हुए उन्हें देश के तोपखाना रेजिमेंट में शामिल किया गया। पांच महिला अधिकारियों में दो की तैनाती पाकिस्तान और तीन की चीन बार्डर पर चुनौतीपूर्ण स्थान पर हुई है।
खेल व संगीत से है लगाव
साक्षी को सैन्य गतिविधियों के अलावा खेल व संगीत से भी लगाव है। खेलों में साक्षी को हैंडबाल, बास्केटबाल, स्क्वॉश में रुचि है। गाने सुनना और गुनगुनाना दोनों पसंद है।
पिता को मानती है प्रेरणा स्रोत
साक्षी दुबे के पिता दिनेश कुुमार दुबे मेजर हैं। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई कुरकुठिया गांव के पास खरहरा प्राथमिक विद्यालय से की थी। इस समय वे सागर मध्य प्रदेश में तैनात हैं। साक्षी बचपन से पिता को आर्मी की वर्दी में देखते हुए बड़ी हुई हैं। साक्षी ने बताया कि उनके पिता उनके आदर्श और प्रेरणास्रोत हैं। उनकी ही प्रेरणा से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। मां संध्या ने भी उनको सपोर्ट किया। उनका छोटा भाई साहस दुबे अभी फर्गुसन काॅलेज से पढ़ाई कर रहा है। वह एयरफोर्स में जाने की तैयारी कर रहा है।
एयरफोर्स की भी लिखित परीक्षा कर चुकी हैं पास
साक्षी ने बताया कि मार्च 2022 में उनका सेलेक्शन आर्मी के लिए हो गया था। उन्होंने बताया कि आर्मी की कंबाइंड डिफेंस सर्विस (सीडीएस) की परीक्षा देने के बाद एयरफोर्स के लिए लिखित परीक्षा पास की थीं। तब तक आर्मी का रिजल्ट आ गया। साक्षी ने बताया कि उनको आर्मी में ही जाना था। एयरफोर्स की परीक्षा इसलिए दी थीं कि उन्हें यह देखना था कि उसमें किस तरह की तैयारी होती है।
गांव आने पर हुआ स्वागत, लोगों ने जताई खुशी
लेफ्टिनेंट बनने पर 29 अप्रैल को पासिंग आउट परेड होने के बाद साक्षी को तोपखाना रेजिमेंट में पांच महिला अधिकारियों के साथ शामिल किया गया। साक्षी अभी छुट्टी पर अपने गांव आई हैं। यहां से जाने के बाद वे तोपखाना रेजिमेंट ज्वाइन करेंगी। गांव आने पर साक्षी का लोगों ने स्वागत किया। उनके दादा सेवानिवृत्त लेखपाल माता अंबर दुबे का तो खुशी का ठिकाना नहीं है। साक्षी के पिता दिनेश के साथी विंग कमांडर संतोष दुबे ने अपने बबुआ पोखरा स्थित आवास पर साक्षी का स्वागत किया। संतोष की माता कमला देवी ने आरती कर मिठाई खिलाकर साक्षी के बेहतर भविष्य की कामना की। इस दौरान साक्षी की माता संध्या दुबे, संतोष दुबे, विदुषी दुबे आदि मौजूद रहीं।
सीडीएस : चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ
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शांत रहिए और कीजिए कठिन परिश्रम
साक्षी ने बताया कि कठिन परिश्रम के बल पर आप हर मुकाम हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को कठिन परिश्रम से नहीं भागना चाहिए। कठिन परिश्रम करने के साथ उनको शांत रहना चाहिए। ताकि लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रहे। कहा कि आर्मी ऐसा क्षेत्र है, जहां सबको मौका मिलता है। आर्मी में आकर देश सेवा से सीधे जुड़ा जा सकता है। यहां आपका व्यक्तित्व व चरित्र निखरता है। कांफिडेंस लेवल बढ़ता है।
इंटर के बाद एनडीए और ग्रेजुएशन के बाद सीडीएस की दे सकते हैं परीक्षा
साक्षी ने देश सेवा के लिए जल-थल-नभ तीनों सेनाओं में अधिकारी बनने के लिए बताया कि युवा इंटर पास करने के बाद एनडीए (नेशनल डिफेंस एकेडमी) की परीक्षा दे सकते हैं। लिखिल परीक्षा पास करने के बाद सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) द्वारा पांच दिन तक साक्षात्कार होता है। तब जाकर सेलेक्शन होता है। स्नातक करने वाले लोगों को कंबाइंड डिफेंस सर्विस (सीडीएस) की परीक्षा देनी होती है। अगर स्नातक में एनसीसी का प्रमाण पत्र प्राप्त किया है तो लिखित परीक्षा न देकर सीधे एसएसबी द्वारा साक्षात्कार होता है। जिसमें काफी कम सीटें होती हैं। इसमें एक सीटी शहीद परिवार के लिए आरक्षित होती है।