अस्पताल रोड स्थित दूकान पर बिकने के लिए सजा चाइनीज सामान।
ब्रह्मपुत्र का पानी रोकने के चीन के फैसले के खिलाफ दूकानदारों में गुस्सा साफ तौर पर देखा जा रहा है। चीन ने नदी का पानी रोका तो अधिकांश दूकानदारों ने चीन में निर्मित सामानों की बिक्री भी रोक दी। दूकानदारों का मानना है कि वर्तमान समय में चाइनीज सामानों की बिक्री में भारी गिरावट आई है और यह गिरावट आगे और बढ़ने की संभावना है। अधिकांश ग्राहक भी अब भारत में निर्मित सामानों को खरीदने लगे हैं।
भारत को सबसे बड़े बाजार के रूप में मानकर चीन ने अपने सस्ते व बिना गुणवत्ता के तमाम उत्पादों का जाल बिछा दिया है। चाहे खिलौने हों या इलेक्ट्रानिक्स आइटम या फिर घरेलू उपयोग की अन्य वस्तुएं, चीन में निर्मित सामानों ने अपनी हर जगह उपस्थिति दर्ज करा दी है, लेकिन बदलते समय के साथ ही नगर के थोक व फुटकर दूकानदारों ने चाइनीज वस्तुुओं के बहिष्कार का मन बना लिया है। चीन के ब्रह्मपुत्र नदी के पानी को रोकने के फैसले से नाराज फुटकर एवं थोक सामानों के विक्रेताओं का कहना है कि जब बात देेश के हित पर आ गई तो दूकानदारों को भी ठोस फैसले लेने होंगे।
इसके लिए चाइना में बनी वस्तुओं का मोह त्यागना पड़ेगा। यही कारण है कि वर्तमान में नगर के प्रमुख बाजारों में चाइनीज सामानों की बिक्री काफी हद तक कम हो गई है। नगर के स्वामी दयानंद मार्ग स्थित कामद गिरी गिफ्ट कलेक्शन के अधिष्ठाता संजय कुमार ने बताया कि वर्तमान में नगर के प्रमुख बाजारों में चाइनीज सामानों की बिक्री काफी हद तक कम हो गई है। वर्तमान में मात्र 30 प्रतिशत ही चाइनीज सामान बिक रहे हैं, जो आगामी दिनों में और भी कम हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि अब ग्राहक भी चाइनीज सामानों को छोड़ कर भारतीय सामनों की मांग करने लगे हैं। ग्राहकों को भी लगने लगा है कि चाइनीज सामानों की बिक्री से जो लाभ पहले चीन को मिलता था, अब बाजारों में भारतीय सामानों की मांग बढ़ने से उसका लाभ भारत को मिलेगा। अभी कुछ दूकानदार बचे सामानों को बेचकर मूलधन निकाल रहे हैं, लेकिन दूकानदारों का मानना है कि आने वाले दिनों में चाइनीज खिलौने सहित समस्त प्रकार के सामानों का बहिष्कार किया जाएगा।