अपर सत्र न्यायाधीश षस्टम राजेश भारद्वाज ने गुरुवार को एक मामले में अहम फैसला सुनाया। कहा कि मात्र दो अपराध करने वाला व्यक्ति अभ्यस्त अपराधी नहीं माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रभारी निरीक्षक की चालानी रिपोर्ट को आधार नहीं माना जा सकता है।
अदालत ने दांडिक पुनरीक्षण की याचिका की सुनवाई करते हुए प्रभारी निरीक्षक की चालानी रिपोर्ट के आधार पर उप जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि अवर न्यायालय ने अपने न्यायिक मस्तिष्क का प्रयोग नहीं किया है।
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि मात्र दो फौजदारी अपराधों के आधार पर गुंडा अधिनियम के अंतर्गत दिए गए नोटिस के आधार पर आरोपी अभ्यस्त अपराधी नहीं माना जा सकता है। अभ्यस्त अपराधी को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि काफी समय के अंतराल के बाद एक दो अपराध करने को अभ्यस्त अपराधी नहीं माना जा सकता है।
पुनरीक्षण याचिका कर्ता का संक्षिप्त कथन है कि प्रभारी निरीक्षक विंध्याचल ने क्षेत्र के रविशंकर व पवन कुमार पुत्र भुल्लर, हरिदास एवं जोगेंद्र पुत्र बसंतलाल निवासी जोधीपुर विंध्याचल के खिलाफ मिनी गुंडा एक्ट के तहत नोटिस जारी कर कहा गया कि क्यों न उन्हें 50 हजार रुपये के मुचलके पर पाबंद किया जाए। आरोपीगण ने कोर्ट में रिविजन दाखिल किया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता केशव प्रसाद पांडेय ने हाईकोर्ट का नजीर प्रस्तुत करते हुए कहा कि न्यायालय द्वारा अपने आदेश में मिनी गुंडा अधिनियम 1970 के अंतर्गत प्रेषित नोटिस को विधि अनुसार पोषणीय नहीं माना है।