आरक्षण की मांग को लेकर मंगलवार को राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के तत्ववधान में जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम के दौरान परिषद के कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय कुमार निषाद के साथ बंद आंदोलनकारियों पर से मुकदमा वापस लिये जाने और उन्हें तुरंत रिहा कराने की मांग की।
जिला मुख्यालय पर आयोजित धरना-प्रदर्शन के दौरान कहा गया कि सात जून को रेल रोको आंदोलन में पुलिस ने फर्जी मुकदमे में सबको फंसाया, जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा था कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर मुकदमे वापस लिए जाएंगे, जो सरकार ने नहीं किया। कहा गया कि आजम खां के भैंस प्रकरण की जांच हो सकती है तो हम निषादों पर हो रहे अत्याचार की जांच क्यों नहीं हुई। 37 आंदोलनकारियों की जमानत होते ही राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय कुमार निषाद को जेल में डाल दिया गया।
सभा के दौरान आरोप लगाया गया कि कोई पार्टी हम निषादों का हक व हिस्सा नहीं देना चाहती है। कहा गया कि लगभग दो सौ विधानसभा सीटों पर 40 से 60 हजार तक निषादों के वोट हैं। इन्हें इसलिए अधिकार नहीं दिया जा रहा है कि आरक्षण के सहारे इनका राजनैतिक, शैक्षिक व आर्थिक कद बढ़ जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि निषादों को आरक्षण नहीं देने से कांग्रेस को सत्ता से दूर होना पड़ा, भाजपा ने वादा नहीं निभाया तो बिहार में करारी हार देखनी पड़ी। मुलायम ने सत्ता में आने के लिए अपने घोषणा पत्र में लिखित वादा किया था, जो पूरा नहीं किया गया। कहा गया कि निषाद समाज को मुख्य धारा में लाने के लिए विगत चार-पांच महीने से हम उचित मांगो को लेकर धरना-प्रदर्शन के माध्यम से प्रधानमंत्री ओर मुख्यमंत्री को अवगत करा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। धरना प्रदर्शन के दौरान कहा गया कि वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में निषाद वोटर सबको सबक सिखाएंगे। इस दौरान जिलाध्यक्ष तुलसीदास बिंद, धनेश, लल्लूराम, राम सजीवन, अतुल चौधरी, आशीष बिंद, संतोष केवट, रमेश बिंद, राजकुमार केवट, रमाशंकर बिंद, डा. शीतला प्रसाद बिंद सहित बड़ी संख्या में निषाद समाज के लोग उपस्थित रहे।