मिर्जापुर। इस वर्ष पूरे नौ दिन का है चैत्र नवरात्र है। जो 13 अप्रैल से शुरु होकर 21 अप्रैल तक रहेगा। इस नौ दिन में माता के भक्त माता के लिए व्रत पूजा पाठ आराधना के माध्यम से मातारानी को प्रसन्न करेंगें। भक्त नवरात्रि का हवन 21 अप्रैल रामनवमी को भक्त हवन करेंगे और व्रत का पारण 22 अप्रैल को करेंगें। आध्यात्मिक धर्म गुरु त्रियोगी मिठ्ठू मिश्र ने बताया इस बार नवरात्रि में मां का आगमन घोड़े पर होगा।
उन्होंने बताया एक वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं। चैत्र, आषाढ़, माघ और शारदीय नवरात्र। इनमें चैत्र और अश्विन यानि शारदीय नवरात्रि को ही मुख्य माना गया है। इसके अलावा आषाढ़ और माघ गुप्त नवरात्रि होती है। चैत्र नवरात्रि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक होता है। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पर माता का आगमन घोड़े पर होगा। नवरात्रि का विशेष नक्षत्रों और योगों के साथ आना मनुष्य जीवन पर खास प्रभाव डालता है। ठीक इसी प्रकार कलश स्थापन के दिन देवी किस वाहन पर विराजित होकर पृथ्वी लोक की तरफ आ रही हैं, इसका भी मानव जीवन पर विशेष असर होता है। यूं तो मां दुर्गा का वाहन शेर को माना जाता है। लेकिन हर साल नवरात्रि के समय तिथि के अनुसार माता अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर धरती पर आती हैं।
त्रियोगी मिट्ठू मिश्र के अनुसार देवीभागवत पुराण में भी कहा गया है कि शशि सूर्य गजरुढा शनिभौमै तुरंगमे, गुरौशुक्रे च दोलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता इस श्लोक में सप्ताह के सातों दिनों के अनुसार देवी के आगमन का अलग-अलग वाहन बताया गया है। अगर नवरात्र का आरंभ सोमवार या रविवार को हो तो इसका मतलब है कि माता हाथी पर आएंगी। वहीं शनिवार और मंगलवार को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी कलश स्थापना हो तब माता अश्व यानी घोड़े पर सवार होकर आती हैं। गुरुवार या शुक्रवार को नवरात्र का आरंभ हो रहा हो तब माता डोली पर आती हैं। बुधवार के दिन नवरात्र पूजा आरंभ होने पर माता नाव पर आरुढ़ होकर आती हैं। देवी मां के वाहन का प्रभाव अबकी चैत्र नवरात्र का आरंभ मंगलवार से हो रहा है। ऐसे में देवी भागवत पुराण के कहे श्लोक के अनुसार उनका वाहन घोड़ा होगा। आध्यात्मिक धर्मगुुरु ने बताया कि अश्व पर माता का आगमन छत्र भंग, पड़ोसी देशों से युद्ध, आंधी तूफान लाने वाला होता है। ऐसे में आने वाले साल में कुछ राज्यों में सत्ता में उथल-पुथल हो सकता है। सरकार को किसी बात से जन विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है। किंतु जिन लोगों पर देवी की विशेष कृपा होगी उनके अपने जीवन में अश्व की गति के सामान ही सफलता की प्राप्ति होगी।
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कलश स्थापना के लिए 4.16 घंटे का समय
मिर्जापुर। कलश स्थापना के बारे में जानकारी देते धर्मगुरु त्रियोगी मिठ्ठू मिश्र ने बताया इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पर भक्त विशेष मुहूर्त में कलश स्थापना करेंगें। कलश स्थापना का विशेष मुहूर्त 13 अप्रैल को सुबह 5 बजकर 58 मिनट से सुबह 8 बजकर 47 मिनट तक व 10 बजकर 14 मिनट तक का समय है। कलश स्थापना के लिए कुल मिलाकर देवी भक्तों के पास चार घंटे 16 मिनट तक का समय रहेगा। घट स्थापना का दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 35 मिनट से 12 बजकर 25 मिनट तक का रहेगा जो अभिजीत मुहूर्त होगा।