शेरवां। आजादी के बाद जमालपुर विकास खंड के भभौरा ग्राम पंचायत भले ही सड़क, नाली, खड़ंजा व पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं से लैस है, लेकिन गांव के चारों तरफ रिंग रोड की आवश्यकता है। प्रमुख पहचान के रुप में गांव में स्थित तालाब सुुंदरीकरण की आज भी बाट जोह रहा है। इसके अलावा मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुंभार भी अपने परंपरागत पेशे को सहेजने के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
लगभग ढाई हजार आबादी व 1803 मतदाताओं वाले इस ब्राह्मण, पटेल, बियार, कुम्हार, यादव, मुस्लिम, दलित, बनिया सहित अति पिछड़े वर्ग के लोग गांव में निवास करते हैं। ग्राम पंचायत में राजस्व गांव मुर्दहवा भी शामिल हैं। गांव में प्रधानमंत्री आवास व पेंशन से आच्छादित है लेकिन आज भी कई गरीब परिवार बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। गांव में कुम्हार गड्ढा तक नहीं जिससे परंपरागत पेशे में लगे परिवारों को मिट्टी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। इस बार के होने वाले चुनाव में गांव का विकास का विकास ही प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। गांव के लोग ऐसे प्रधान पद के दावेदार को प्रधान चुनेंगे जो उनके विकास की सोच व धरातल पर उतारने में सामर्थ्य हों।
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-पहले चुनाव सामान्य तरीके व संभ्रांत व्यक्ति को ही प्रधान चुन लिया जाता रहा। अब यही हाईटेक हो गया है। आज धन बल व जातिवाद के आधार पर मुखिया चुने जा रहें है।-जय नारायण तिवारी, सेवा निवृत्त शिक्षक।
- विकास ही इस बार गांव का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। गांव के लोग उसी को प्रधान चुनेंगे, जो विकास की सोच व उसे धरातल पर उतारने की सामर्थ्य हो। ऐसे लोगों को ही प्राथमिकता दी जाएगी।-रेखा देवी।
-गांव का मुखिया पढ़ा-लिखा व विकास कराने वाला होना चाहिए। जो जाति, धर्म से उपर उठकर सभी के सुख दुख में होने वाला हो।-मुन्नवर अंसारी।
-आजादी के बाद जिस तरह से गांव का विकास होना चाहिए वह अभी तक नहीं हुआ। आज भी गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। विकास करने वाला ही हमारा पहला पसंद होगा।- अजीत कुमार सिंह।
-कुम्हार गड्ढा न होन से रोजी-रोटी का संकट खड़ा है। गड्ढा के लिए जमीन उपलब्ध कराने वाले को ही गांव का प्रधान बनाया जाएगा।-मुकेश प्रजापति।
- इस वर्ष गांव में ग्राम प्रधान की सीट सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है। ऐसे में गांव के सभी जाति, धर्म व संप्रदाय के लोगों को मौका मिलना चाहिए। यही लोकतंत्र की प्रक्रिया है।-सतीश चंद्र पटेल, निर्वतमान प्रधान।