विभिन्न गंगा घाटों पर स्नान व ध्यान के बाद श्रद्धालुओं का कारवां मंदिर की ओर जाने वाले विभिन्न मार्गों की ओर कूच कर रहा था। भोर तक गर्भगृह की ओर जाने वाले मार्ग पर लंबी कतारें लग गईं। मंगला आरती के बाद जैसे ही मंदिर का कपाट खुला कि मां विंध्यवासिनी की एक झलक पाने के लिए श्रद्घालु उमड़े पड़े।