मिर्जापुर-विंध्याचल। मां विंध्यवासिनी मंदिर का गर्भगृह एक महीने में स्वर्ण मंडित हो जाएगा। गर्भगृह में लगभग चार किलो सोना और 40 से 50 किलो चांदी से दीवारों को सुसज्जित किया जाएगा।
यह निर्णय जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन की अध्यक्षता में जिला मुख्यालय पर हुई विंध्य विकास परिषद की बैठक में लिया गया। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में एक टीम मां विंध्यवासिनी मंदिर पहुंची। जहां गर्भगृह में होने वाले कार्यों के लिए नापी इत्यादि की प्रक्रिया पूरी हुई। मां विंध्यवासिनी मंदिर के गर्भगृह में लगभग चार किलो सोना लगाने के अलावा 40 से 50 किलो चांदी से दीवारों को सजाया जाएगा। विग्रह के आसपास सोने की चादर और खंभों पर चांदी लगाई जाएगी।
मां विंध्यवासिनी पर गहरी आस्था रखने वाले भदोही के उद्यमी संजय सिंह ने इन कार्यों पर आने वाले खर्च लगभग चार करोड़ रुपये दान देने की पेशकश की है। इसी को लेकर सोमवार को विंध्य विकास परिषद की बैठक हुई। इस दौरान काम शुरू करने की तिथि, समय और काम समाप्त होने के समय आदि पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद एक टीम सिटी मजिस्ट्रेट लाल बहादुर सिंह के नेतृत्व में विंध्याचल गई। इसमें दान दाता के साथ लोक निर्माण तथा अन्य विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल रहे। इस दौरान समिति के सदस्य भी मौजूद रहे। मंदिर के गर्भगृह में नापी के साथ ही बाकी बिंदुओं पर चर्चा हुई। मंदिर में नापी के दौरान लोक निर्माण विभाग के अवर अभियंता प्रवीण कुमार, विंध्य विकास परिषद के सदस्य भानु पाठक आदि मौजूद रहे। गर्भगृह को स्वर्ण मंडित करने के लिए तेजी से काम शुरू हो गया है। प्रशासनिक अधिकारी यह भी प्रयास कर रहे हैं कि काॅरिडोर के लोकार्पण से पहले गर्भगृह का काम भी पूरा करा लिया जाए। सबसे बड़ी समस्या यह है कि मंदिर में काम उसी समय हो सकेगा, जब दर्शन-पूजन नहीं होगा। इस काम के लिए समय निकालना बड़ी चुनौती है। हालांकि ऐसे विकल्पों पर भी विचार हो रहा है कि नापी इत्यादि के बाद बाहर से ही सब कुछ तैयार करा लाया जाए, ताकि गर्भगृह में बस फिट करना हो। जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन का कहना है कि मां विंध्यवासिनी मंदिर के गर्भगृह को एक श्रद्धालु द्वारा स्वर्ण मंडित करने की इच्छा व्यक्त की गई है। इसको लेकर विंध्य विकास परिषद की बैठक हुई। इस प्रक्रिया को एक महीने के अंदर पूरा कराने का निर्णय लिया गया है।