श्रावण शुक्ल पक्ष एकादशी पर विंध्यधाम में मां के भव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन करने को तांता लगा रहा। महिलाआें ने हलवा-पूड़ी का भोग लगाकर पूजन किया, वहीं मां का फूलाें से किया गया भव्य श्रृंगार का दर्शन पाकर श्रद्धालु अभीभुत हो उठे। घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा एवं माता के जयकारे से मंदिर गुंजायमान हो रहा था।
जगत जननी मां विंध्यवासिनी के भव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन करने को दर्शनार्थियों का रेला लगा रहा। दूरदराज से आए श्रद्धालु माला-फूल, नारियल-चुनरी एवं प्रसाद लेकर मंदिर पहुंचे, जहां मां के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर निहाल हो उठे। घंटा-घड़ियाल, शंख व मां के जयघोष से मंदिर परिसर भक्तिमय हो रहा था। निर्धारित समय पर होने वाली मां की आरती के समय कपाट बंद होने से गलियों में लगी भक्ताें की कतार थम गई, आरती उपरांत मां का कपाट खुलते ही कतार में खड़े श्रद्धालु मंदिर की तरफ बढ़ने लगे थे।
मंदिर पहुंचने के बाद आस्थावानाें ने बड़े ही श्रद्धाभाव से मां के चरणों में शीश नवाया तथा मंदिर परिसर स्थित सभी देवताआें के मंदिरों में पहुंचकर दर्शन-पूजन कर मंगलकामना की। मंदिर की छत पर मुंडन व जनेऊ संस्कार का दौर अनवरत चलता रहा, वहीं मंदिर के गुंबद व हवन कुंड का परिक्रमा करने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ मची रही।
मां का दर्शन करने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु अष्टभुजा पहाड़ पर त्रिकोण परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने। विंध्य क्षेत्र के मंदिराें, पहाड़ाें, कंदराआें, व गुफाआें में साधक मंत्रोच्चार बीच साधना करते दिखे। मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा-व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी।