मिर्जापुर। फिलहाल कोविड संक्रमण कम है। पर 2020 से शुरू हुए संक्रमण ने बढ़ते स्वरूप के साथ अधिक से अधिक लोगों को अपने चपेट में लिया। अधिक लोग संक्रमित हुए तो मौत का ग्राफ भी बढ़ा। कोविड संक्रमण की शुरुआत में आईसोलेशन आदि की समस्या थी तो तीसरे लहर तक जिले में एल-टू अस्पताल से लेकर आक्सीजन और अन्य उपकरण की उपलब्धता रही।
बात 2020 की करें तो प्रथम संक्रमण के समय हर कोई डरा हुआ था। लाकडाउन लगा।कोविड संक्रमित मिलने पर वह इलाका सील कर दिया जाता था। प्रथम संक्रमण में भयावहता रही, पर मरने वालों की संख्या कम रही। एक वर्ष बाद 2021 में जब दूसरी लहर आई तो संक्रमण का दायरा बढ़ गया। दूसरी लहर में पहले से कई गुना संक्रमित मिले। इस लहर में मौत भी पहले दौर के तुलना में अधिक हुईं। तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमण की आशंका थी। तब तक टीकाकरण काफी लोगों को हो चुका था। इसके चलते तीसरी लहर में संक्रमित कम रहे और मौतें भी कम हुईं।
प्रथम लहर- संक्रमित मिले- 1611
मौत- 18
दूसरी लहर- संक्रमित मिले- 8662
मौत- 99
तीसरी लहर- संक्रमित मिले- 1808
मौत-10
शुरुआत में रही डाटा गड़बड़ी
कोविड के संक्रमितों के मिलने और डाटा में गड़बड़ी होती रही। दरअसल कुछ लोग मिर्जापुर जिले के निवासी थे, पर जांच कहीं और कराई थी। संक्रमित होने पर उनका डाटा आने में समय लगा। जिसे बाद में मिर्जापुर के पोर्टल पर अपडेट किया जाता। अब डाटा बिल्कुल सही हो गया है।
अन्य अभियानों से पड़ा असर
कोविड टीकाकरण अभियान लगातार जारी है, पर 16 मार्च से 12-14 वर्ष के बच्चों का टीकाकरण शुरू हुआ, पर रफ्तार सुस्त रही। कारण कि इंद्रधनुष मुहिम के तहत गर्भवती महिलाओं व बच्चों के बचाव की मुहिम व पोलियो टीकाकरण अभियान भी इस दौरान चला। नौ मार्च से 16 मार्च तक मिशन इंद्रधनुष और 20 मार्च से 28 मार्च तक पोलियो टीकाकरण अभियान चला। इस कारण कोविड टीकाकरण अभियान पर असर पड़ा।