मिर्जापुर। मशीनी युग में जब बच्चों से लेकर बड़े तक दिमाग चलाने के बजाय कंप्यूटर-मोबाइल की मेमोरी पर ज्यादा भरोसा करते हैं। वहीं, अदलहाट थाना क्षेत्र के परशुरामपुर की सीतापति पटेल अपनी याददाश्त के लिए नालेज दादी के नाम से इलाके में जानी जाती हैं। 62 वर्ष की हो चुकीं सीतापति पटेल को परिवार ही नहीं उन सभी के नंबर याद हैं जो उनसे कभी मिले और अपना नंबर साझा किया। इसके अलावा इमरजेंसी नंबर भी उनकी जुबान पर हैं।
खेती किसानी के परिवार से ताल्लुक रखने वाली सीतापति पटेल कभी स्कूल नहीं गईं। पर लोगों की मदद और समाजसेवा के कार्य ने उनको इलाके में पहचान दिलाई है। उन्होंने बताया कि पहला नंबर साल पहले याद किया। उसके बाद से नंबरों की वह डायरेक्ट्री दिमाग में सहेजती चली गईं। आस-पड़ोस के थानों के सीयूजी नंबर, पुलिस अधिकारियों के नंबर, जिले के विधायक, सांसद, मंत्री और सरकार द्वारा लोगों की मदद और सुविधाओं के लिए जारी किए गए नंबर जुबानी याद है। दिन प्रतिदिन उनके याददाश्त में नंबरों को याद करने की संख्या बढ़ती जा रही है। यहां तक की गांव में किसी आस-पास के लोग उनके नंबर पूछने आते है। लोगों की मदद के लिए वे खुद भी अपने फोन से संबंधित अधिकारी और थाने में फोन करके समस्या निस्तारण के बारे में बात करती है। जब उनसे कोई नंबर पूछता है तो वह इस तरह से नंबर बोलती है कि सामने वाला हैरान रह जाता है। जब उनसे कोई पूछता है कि उनको ये सब कैसे याद है तो वह बड़े उत्साह से कहती है कि उनको नालेज है।