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भोजन बनाने के साथ बॉयोगैस के जरिए चला सकते है जेनेरेटर

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मिर्जापुर। पराली समस्या से जूझ रहे किसान अब बॉयोगैस के जरिये एक पंथ, दो काज कर सकते हैं। इसके माध्यम से भोजन बनाने के साथ ही न सिर्फ जनरेटर चला कर घर में प्रकाश कर सकते हैं बल्कि आटा चक्की व सबमर्सिबल चला कर खेतों की सिंचाई कर सकते हैं। इस कार्य में कोई सरकारी अनुदान तो नहीं, लेकिन जिला उद्यान विभाग की ओर से किसानों को इसकी तकनीकी जानकारी के साथ उन्हें इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है।
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बॉयोगैस प्लांट के निर्माण पर लगभग साठ हजार रुपये खर्च आता है। इसमें प्रतिदिन 10 घनमीटर गैस तैयार हो सकती है। प्लांट को तैयार करने में लोहे का इस्तेमाल नहीं किया जाता। सभी उपकरण कंकरीट से बने होते हैं। गैस होल्डर फाइबर का होता है। बॉयोगैस के लिए मात्र दो पशु के गोबर और जैविक अपशिष्ट की आवश्यकता पड़ती है। जहां सामान्य गोबर गैस में प्रतिदिन गोबर आदि डाले जाते हैं। वहीं इसमें 15 दिनों पर मात्र दो पशु के गोबर और पराली के टुकड़े या अन्य अपशिष्ट डाले जा सकते हैं। इस संयंत्र से निर्मित गैस को पाइप लाइन के जरिये लगभग सौ मीटर तक आसानी से ले जाया जा सकता है। एक प्लांट से आसानी से तीन चूल्हे जल सकते हैं।
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