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मिर्जापुरः प्रकृति को अधिक खतरा प्लास्टिक पदार्थों से, विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के उपलक्ष्य में गोष्ठी का समापन

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मिर्जापुर। जिला विज्ञान क्लब के तत्वावधान में आयोजित विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस का बृहस्पतिवार को दूसरे दिन समापन किया गया। दूसरे दिन प्लास्टिक एवं पॉलीथिन का प्रकृति व ग्लोबल वार्मिगिं पर प्रभाव पर चर्चा की गई।
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जिला समन्वयक सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि प्रकृति को सबसे ज्यादा खतरा प्लास्टिक एवं पॉलीथिन का अधिक प्रयोग से है। जगह जगह फैले कूड़े के ढेर में अधिकतर पॉलीथिन व प्लास्टिक की बोतलें दिखाई देती हैं। ये हमारे पर्यावरण के लिए खतरा बन गई हैं। पर्यावरणविद पीके मौर्य ने कहा कि ऐसे सॉलिड वेस्ट जो प्रतिदिन हमारे घरों से निकलते हैं, इसके प्रबंधन में अंग्रेजी के आर को पांच बार प्रयोग में लाए। यानि रिड्यूस, रीसाइकिल, रियूज, रिकवर और रेजिडुअल्स मैनेजमेंट। यदि इन पांच आर पर अमल किया जाए तो काफी हद तक ऐसे कूड़े का प्रबंधन कर प्रकृति को बचा सकते हैं। भू वैज्ञानिक डॉ. एसके शुक्ला ने कहा कि मिट्टी में भी प्लास्टिक के दुष्परिणाम आ रहे हैं। शोध छात्र रजत पांडेय ने कहा कि बोतल बंद पानी में भी प्लास्टिक, दवाओं की प्लास्टिक बोतलें स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं। गोष्ठी के समापन में सभी ने प्रकृति संरक्षण की शपथ ली। कहा कि जो पदार्थ प्रकृति का दोहन कर रहे हैं। हमें त्याग करना चाहिए। हम सभी प्रकृति पर ही निर्भर हैं।
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