सरस्वती फाटक के पास स्थित मिर्जापुर मठ शुक्रवार को विश्वनाथ मंदिर परिसर का हिस्सा हो गया। दोपहर बाद बाबा विश्वनाथ के नाम इस मठ की रजिस्ट्री करा दी गई। इससे पहले मंदिर प्रशासन ने नाटी इमली स्थित जम्मू-कश्मीर स्टेट की कोठी खरीदी थी।
लंबे समय से प्रतीक्षित मिर्जापुर मठ का सौदा विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के पूर्व सदस्य उमाशंकर पोद्दार की पहल पर संभव हो सका। सर्किल रेट के हिसाब से इस मठ की कीमत 70 लाख रुपये है मठ प्रबंधन से जुड़े लोगों ने सिर्फ 24 लाख रुपये में बैनामा कर दिया।
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इतना ही नहीं इस सौदे के रूप में 24 लाख रुपये की धनराशि झारखंड के चाईबासा निवासी दानदाता नंदलाल रूंगटा ने अदा की। मुख्य कार्यपालक अधिकारी एसएन त्रिपाठी ने रजिस्ट्री के लिए स्टांप ड्यूटी के मद में छह लाख रुपये खर्च करने पड़े।
सीईओ के रूप में त्रिपाठी के कार्यभार संभालने के महज महीने भर बाद यह दूसरा बैनामा हुआ है। मंदिर प्रशासन के अनुसार छह अन्य भवनों का मूल्यांकन कराया जा चुका है, सौदा तय होते ही उनका बैनामा करा लिया जाएगा।