पीड़ित का कहना है कि इसके बाद उसे जबरन अष्टभुजा पुलिस चौकी ले जाया गया, जहां भी उसके साथ मारपीट की गई। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसे करीब 24 घंटे तक चौकी में रखा गया और इस दौरान उसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। पीड़ित के अनुसार, छोड़ते समय पुलिसकर्मियों ने धमकी दी कि यदि उसने किसी से शिकायत की तो उसे करंट लगाकर मार दिया जाएगा।
घटना की जानकारी मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि उन्हें भी नाबालिग से मिलने नहीं दिया गया। बाद में पीड़ित ने पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सोहन श्रीमाली को ज्ञापन सौंपकर न्याय की मांग की। श्रीमाली ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक से कार्रवाई के लिए बात की।
इस पूरे प्रकरण पर मिर्जापुर की पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक ने कहा कि मामला दुकान के सामने पंखा लगाने से जुड़ा है, जिससे रास्ते में आने-जाने वाले दर्शनार्थियों को असुविधा हो रही थी। हालांकि, पिटाई के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए जांच सीओ सिटी को सौंप दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।