नवरात्र के आखिरी दिन मंदिर के गुंबद का परिक्रमा करने एवं हवन कुंड में आहुतियां डालने के लिए लोग आतुर दिखे। मंदिर के छत पर जगह-जगह आसन पर बैठकर साधक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच साधना करने में तल्लीन दिखाई दिए।
भक्तों ने विंध्यधाम में विराजमान समस्त देवी-देवताओं के मंदिरों में जाकर शीश झुकाया। मां का दर्शन-पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने त्रिकोण परिक्रमा किया। त्रिकोण परिक्रमा के दौरान पहाड़ पर भक्त मां काली, मां अष्टभुजी देवी, मां तारा देवी एवं राधा-कृष्ण मंदिरों में जाकर पूजन-अर्चन किया।