जमालपुर। स्थानीय विकास खंड के सैकड़ों प्रवासी मजदूरों को श्रमिकों का दर्जा नहीं मिल सका। ब्लॉक मुख्यालय की सूची व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधार पर 1900 लोगों को सूची के बाहर रखा गया। जो इस समय सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं। जमालपुर क्षेत्र में प्रवासी मजदूरों के लिए निगरानी समिति होने के बावजूद बाहर से आए प्रवासियों को श्रमिक का दर्जा नहीं मिला जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बाहर से आए व्यक्ति की सूची तीन हजार छह सौ लोगों की है।
वहीं ब्लॉक मुख्यालय पर मात्र 1669 लोगों की सूची जिला से उपलब्ध हो पाई है। इसमें सिर्फ 550 प्रवासी मजदूरों को रोजगार मिल पाया। ऐसे बहुत से लोग हैं जो अन्य प्रदेशों से पैदल, टैंपो, टैक्सी आदि से आए, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर रजिस्ट्रेशन कराया। इसके बाद करीब 1931 प्रवासी मजदूरों को लाभ नहीं मिला। जिलाधिकारी के निर्देश के बावजूद निगरानी समिति गांव में बाहर से आए लोगों को चिह्नित नहीं कर सकी। शासन के निर्देश के बावजूद प्रवासी के साथ बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। मनरेगा के नाम पर सरकार का करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाया गया लेकिन प्रवासी मजदूर आज भी रोजगार के लिए क्षेत्र में भटक रहे हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. राजन ने बताया कि हमारे यहां जो भी बाहर से श्रमिक आए थे उनमें तीन हजार छह सौ लोगों का थर्मल स्क्रीनिंग कराया गया था।