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Mirzapur News: रोडवेज बसों के फर्स्ट एड बॉक्स में कई साल से नहीं रखीं दवाइयां

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मिर्जापुर। रोडवेज बस में सफर करते समय चोट लग गई या सिर दर्द, बुखार हुआ तो आपको बस से उतरना होगा और अस्पताल जाना होगा। बस में उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है। जबकि नियम है कि बस में फर्स्ट एड बाॅक्स में जरूरी दवाएं और मरहम पट्टी रहनी चाहिए, पर यहां की बसों में तो फर्स्ट एड बाॅक्स ही बीमार हैं। दस से अधिक बसों की पड़ताल में टूटे-फूटे फर्स्ट एड बाॅक्स लटकते मिले। जब बाॅक्स ही सुरक्षित नहीं है तो दवा की उम्मीद करना भी बेमानी है।
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रोडवेज बस का सफर करते समय बहुत से लोगों को उल्टी आदि की समस्याएं रहती हैं। साथ ही सफर के दौरान कभी-कभी बुखार और बदन दर्द आदि की समस्या आती है। बस में सफर के दौरान हल्टी चोट भी लग जाती है। दूर के सफर में यात्रियों को समस्या न हो, इसके लिए फर्स्ट एड बाॅक्स रहता है। इसमें बुखार, दर्द, चोट लगने पर मरहम पट्टी का सामान व दवाएं रखी रहती हैं। रोडवेज मिर्जापुर में इस समय 85 बसें हैं। इनमें 16 बसें अनुबंधित हैं, बाकी निगम की बसें है। कुछ नई बसों को छोड़ दें तो हर बस में रखे फर्स्ट एड बाॅक्स की हालत दयनीय है। सोनभद्र, वाराणसी आदि रूटों पर जाने वाले 10 से अधिक बसाें की पड़ताल करने पर किसी में फर्स्ट एड बॉक्स की हालत सही नहीं दिखी। कई में तो फर्स्ट एड बाॅक्स दिखाई ही नहीं दिए। जिसमें दिखा तो फर्स्ट एड बाॅक्स खुद बीमार नजर आया। टूटे-फूटे हालत में फर्स्ट एड बॉक्स लटका दिखाई दे रहा था। कई फर्स्ट एड बाॅक्स को तो देखकर लग रहा है कि कई साल से दवा रखी ही नहीं गई है।

फर्स्ट एड बॉक्स में रहता है ये सामान
रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स में सामान्य चोटों के इलाज के लिए आवश्यक चीजें होनी चाहिए। जैसे कि पट्टी, मरहम, एंटीसेप्टिक, दर्द निवारक दवाएं और कुछ अन्य जरूरी सामान। सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द और अन्य दर्द के लिए दर्द निवारक दवाएं होनी चाहिए। कैंची, चिमटी और सेफ्टी पिन जैसे छोटे उपकरण भी बॉक्स में होने चाहिए।
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फर्स्ट एड बॉक्स बस में रहता है। वह परिचालक के पास रहता है। जरूरत पड़ने पर लोगों को उपलब्ध कराया जाता है। - कल्पना श्रीवास्तव, एआरएम, रोडवेज
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