जिले में इस समय कई ऐसे ईंट भट्ठे संचालित हैं, जो जीएसटी में पंजीकृत नहीं है, लेकिन जिला पंचायत में उनका ब्योरा दर्ज है। जिले में ऐसे ईंट भट्ठों की संख्या लगभग 30 के आसपास बताई जा रही है। जिनका पंजीकरण तो है लेकिन वे जीएसटी में पंजीकृत नहीं हैं।
इस समय जिला पंचायत के अभिलेखों में 343 ईट भट्ठे पंजीकृत हैं, जबकि जीएसटी में 313 ईंट भट्ठों का पंजीकरण किया गया है। इससे साफ तौर पर 30 भट्ठों का अंतर है। हालांकि समय-समय पर जिला पंचायत की ओर से नवीनीकरण व निरस्तीकरण के लिए अभियान भी चलाया जाता है। पिछले वित्तीय वर्ष में जिला पंचायत में लगभग 165 ईंट भट्ठों का पंजीकरण निरस्त किया गया था। इस वर्ष भी कार्रवाई के लिए अभियान चलाया जा रहा है। बहुत से ईंट भट्ठा संचालक जिला पंचायत में पंजीकरण तो करा लेते हैं, लेकिन वे ईंट का उत्पादन नहीं करते हैं। इस वजह से वे जीएसटी में भी अपना पंजीकरण नहीं कराते हैं। कभी किसी कारणवश तो कभी आर्थिक व अन्य समस्याओं के कारण ऐसा होता है। आर्थिक दिक्कतों व अन्य समस्याओं के चलते कई ईंट भट्ठों के मालिक पंजीकरण वाले वर्ष में भट्ठों का संचालन न करके अगले वर्ष उसका नवीनीकरण कराने के बाद ईंट का उत्पादन शुरू करते हैं। बहुत से लोगों की सीजन में तैयारी नहीं हो पाती है। इसके चलते वे भट्ठों का संचालन नहीं कर पाते हैं। हालांकि सरकारी तौर पर इस प्रकार की गतिविधियों को अनियमितता की श्रेणी में रखा जाता है और ऐसे ईंट भट्ठों का पंजीकरण निरस्त करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण इकाई कार्यालय में जिले के मात्र 200 ईंट भट्ठे ही पंजीकृत हैं। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी टीएन सिंह ने बताया कि पंजीकरण होता रहता है। फिलहाल इस समय इनकी संख्या 200 है। जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी नीतू सिंह सिसौदिया का कहना है कि जिला पंचायत में इस समय लगभग 343 ईंट भट्ठे पंजीकृत हैं। पिछले वर्ष लगभग 165 ईंट भट्ठों का पंजीकरण निरस्त किया गया था। नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। उपायुक्त राज्य कर अनिल सिंह का कहना है कि इस समय जीएसटी में 323 ईंट भट्ठों का पंजीकरण कराया गया है। पंजीकरण की प्रक्रिया निरंतर जारी रहती है।