बीएचयू के कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि महामना के सपनों को पूरा करना उनकी प्राथमिकता में है। राजीव गांधी दक्षिणी परिसर की अधूरी परियोजनाआें को जल्द पूरा किया जाएगा।
उन्होंने काम करने की बजाय शोध को सशक्त करने की जरूरत बताई। कुलपति ने विश्वविद्यालय में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम को शत-प्रतिशत लागू करने पर जोर दिया। बुधवार को बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर का भ्रमण करने के दौरान पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित काशी हिंदू विश्वविद्यालय को एजूकेशनल लीडर बनाना उनका सपना है।
भारतीय संस्कृति और मूल्यों को आधार बनाकर विश्वविद्यालय में ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जाएगा जिससे यह वैश्विक स्तर न केवल नाम कमाए बल्कि उसकी रैंकिंग में भी सुधार हो।
उन्होंने कहा कि बीएचयू में कोई नई परिकल्पना करने की जरूरत नहीं, बल्कि मालवीय जी की परिकल्पना को आज के परिप्रेक्ष्य में स्थापित करने की जरूरत है।
कुलपति ने कहा कि दक्षिणी परिसर में शोध कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा। ऐसे विषय जिस पर शोध करने की जरूरत है, उसके लिए एक कमेटी बनेगी जिसके माध्यम से शोध और शिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसके लिए विदेशी विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ समझौता किया जाएगा। विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों को जोड़कर विश्वविद्यालय का विकास किया जाएगा।
गंगा सफाई से जुड़े प्रश्नों केउत्तर में उन्होंने कहा कि गंगा सफाई एक अंतरविषयक मुद्दा है। इस क्रम में बीएचयू में नदी विकास एवं जल संसाधन केंद्र स्थापित करने की तैयारी है।