मां विंध्यध्यवासिनी जयंती पर परिसर में उमड़े श्रद्धालु।- संवाद।
विंध्याचल। देवी जयंती पर रविवार को विंध्यधाम माता के जयकारों से गूंज उठा। भोर में मंगला आरती के साथ शुरू हुआ मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन देर रात तक चलता रहा। मां का फूलों और रत्नों से भव्य शृंगार किया गया।
गंगा स्नान और ध्यान के बाद श्रद्धालुओं ने मां विंध्यवासिनी को नारियल, चुनरी और फूल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। भक्तों ने दर्शन-पूजन के साथ त्रिकोण परिक्रमा कर माता से आशीर्वाद मांगा। रविवार को अवकाश होने के कारण माता दरबार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने मां विंध्यवासिनी के अलावा मां अष्टभुजा और महाकाली के दर्शन-पूजन किए।
90 किमी पैदल चल मां विंध्यवासिनी के दरबार पहुंचे श्रद्धालु
विंध्याचल। आस्था के कदमों के आगे 90 किलोमीटर की दूरी भी छोटी पड़ गई। मां विंध्यवासिनी-अष्टभुजा जन्मोत्सव के अवसर पर प्रयागराज से निकली श्रद्धालुओं की पदयात्रा रविवार को विंध्याचल धाम पहुंची।
सावन पूर्णिमा पर प्रयागराज के नैनी स्थित गंगा घाटों पर स्नान के बाद विभिन्न सेवा संस्थाओं से जुड़े श्रद्धालुओं ने मां विंध्यवासिनी की झांकी के साथ पदयात्रा शुरू की। श्रद्धालु मेजा, मांडा और जिगना होते हुए करीब 90 किलोमीटर की दूरी तय कर विंध्यधाम पहुंचे।
रास्तेभर जय मां दुर्गा, जय मां तारा, दयामय कल्याण करो के जयघोष गूंजते रहे। विंध्याचल पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने रोडवेज परिसर में झांकियां खड़ी कीं और मां विंध्यवासिनी के दरबार पहुंचकर दर्शन-पूजन किया।
मां विंध्यध्यवासिनी जयंती पर परिसर में उमड़े श्रद्धालु।- संवाद।