अहरौरा। हजारों वर्ष पुरानी परंपरा के तहत सावन के दूसरे मंगलवार को मां भंडारी देवी को उनके मायके बेलखरा सीयूर स्थित राजा कर्णपाल सिंह की पहाड़ी से डोली में बैठाकर अहरौरा स्थित उनके मंदिर लाया गया।
मां की डोली के साथ श्रद्धालु जयकारा लगाते हुए पैदल चले। मां के दर्शन के लिए डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने से अहरौरा क्षेत्र में चारों तरफ जाम की स्थिति बनी रही। यातायात व्यवस्था संभालने में पुलिसकर्मियों के पसीने छूट गए। श्रद्धालुओं और राहगीरों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा।
हर तीसरे वर्ष होने वाली इस परंपरा के अनुसार सुबह 10 बजे भंडारी देवी मंदिर विकास समिति से जुड़े पदाधिकारी शिशिर पांडेय, नित्यानंद पांडेय, अजय पांडेय, संदीप पांडेय और दुर्जय पांडेय तथा पुजारी जयप्रकाश पांडेय और दर्शनिया सुक्खू बाबा सीयूर पहुंचे। हनुमान मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद सभी राजा कर्णपाल सिंह की पहाड़ी पर पहुंचे। यहां कहारों ने डोली तैयार की। दर्शनिया सुक्खू बाबा ने मनवना कर मां भंडारी देवी को डोली में विराजमान कराया। इसके बाद कहार डोली लेकर मंदिर की ओर चल पड़े। पीछे हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां के जयकारे लगाते हुए चलते रहे।
फसलों के बीच से गुजरता है मां का डोला
मां भंडारी देवी की डोली पहाड़ी से उतरने के बाद खेतों के बीच बनी पगडंडियों से होकर मंदिर की ओर जाती है। डोली के पीछे हजारों श्रद्धालु भी पैदल चलते हैं। मान्यता है कि मां का डोला जिस खेत और फसल के बीच से होकर गुजरता है, वहां पैदावार अच्छी होती है। इसी आस्था के चलते किसान भी मां के डोले के अपने खेत से गुजरने को सौभाग्य मानते हैं।
पहाड़ से उतरते समय महिलाओं ने दी धार
मां भंडारी देवी की डोली जब बेलखरा गांव से होकर गुजरी तो महिलाओं ने हाथों में फूल-माला और अगरबत्ती लेकर जगह-जगह पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने लोटे से जल की धार देकर लोकगीत गाए और नम आंखों से मां को विदा किया।
भंडारी देवी को विदा कराने पहुंचे श्रद्धालु की भीड़, संवाद
भंडारी देवी को विदा कराने पहुंचे श्रद्धालु की भीड़, संवाद