विंध्याचल। आम श्रद्धालुओं के लिए मां विंध्यवासिनी मंदिर कपाट खोले जाने की भनक से स्थानीय लोगों के साथ ही दुकानदारों के चेहरे शुक्रवार को खुशी से खिल उठे। 20 मार्च से ही बंद दुकानों के चलते फिर से रोजी-रोटी शुरू होने की आस में स्थानीय दुकानदार अपनी तैयारी में लग गए। वहीं, कोरोना को लेकर दुकानदार भी सजग है। आम श्रद्धालुओं की बात कौन करे स्थानीय लोगों को भी बगैर मास्क के दुकानों में नहीं आने दिया जाएगा।
लॉकडाउन के पश्चात जहां आस्थाधाम की गलियां सूूनी दिख रहीं थी। वहीं अब मंदिर खुलने को लेकर चहल-पहल बढ़ गई है। धर्मशाला, होटल, रेस्टोरेंट्स के दुकानदारों ने श्री विंध्य पंडा समाज के इस फैसले को स्थानीय लोगों के हित में लिए गए फैसले की बात करते हुए इसकी सराहना की है। दुकानदार अपने-अपने दुकानों की साफ-सफाई मे जुट गए हैं। जबकि माला-फूल, प्रसाद व नारियल के आर्डर लिए जाने भी शुरू हो गए हैं।
दुकानदारों ने जताया हर्ष
दुकानदार झूलन मोदनवाल का कहना है कि तीन माह से अधिक मां विंध्यवासिनी मंदिर का कपाट बंद होने से सभी के सामने रोजी-रोटी के संकट खड़े हो गए थे। मंदिर खुलने परिवार का भरण पोषण करने में आसानी होगी। वहीं दुकानदार सल्लन रावत ने कहा कि वैश्विक महामारी को लेकर विंध्याचल का आमजन जागरुक हैं। मंदिर खुलने के बाद दुकानों पर भी आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का बखूबी पालन कराया जाएगा। इसके अलावा रवि अग्रहरि ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से ही आस्थाधाम विंध्याचल की गलियो में स्थित दुकाने बंद चल रही थी। मंदिर कपाट खुलने से सभी के आर्थिक स्थिति में सुधार आएगी। विकास चौरसिया का कहना है कि कोरोना को देखते हुए स्थानीय लोगो के साथ ही बाहर से आने वाले श्रद्धालुओ पर विशेष नजर रखी जाएगी। बगैर मास्क के किसी को भी दुकान मे घुसने नहीं दिया जाएगा।