मिर्जापुर। शास्त्री पुल का पाथवे क्षतिग्रस्त होने के बाद केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूर्व में हुई शास्त्री पुल की मरम्मत की विजलेंस से जांच कराने की मांग की है।
पत्र में उन्होंने कहा है कि मिर्जापुर में गंगा नदी पर बने शास्त्री पुल की मरम्मत के लिए लोक निर्माण विभाग के विशेष सचिव द्वारा 23 मार्च 2020 को जारी शासनादेश में आठ करोड़ दो लाख 25 हजार रुपये अवमुक्त किए जाने के बाद काम पूरा कराने की बात कही गई थी। दो साल पहले पुल की मरम्मत पर आठ करोड़ रुपये से ज्यादा धनराशि खर्च होने के बावजूद उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की मिर्जापुर इकाई द्वारा बार-बार जिला प्रशासन को पत्र लिखकर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाने की मांग की गई। पुल में कई जगह दरार दिखने, प्राथमिकता वाले कार्यों की उपेक्षा कर अनावश्यक कार्यों को कराने तथा भारी वाहनों के पुल से गुजरने पर कंपन होने आदि की समस्याएं मरम्मत के काम में अनियमितता को ओर इशारा कर रही हैं। उन्होंने पत्र में कहा है कि मात्र दो साल के अंतराल में 29 मार्च 2023 को लोक निर्माण विभाग के शासनादेश द्वारा दोबारा 7.48 करोड़ रुपये खर्च कर पुल की मरम्मत कराई गई। इसके बाद भी पुल क्षतिग्रस्त हो गया। उन्होंने पत्र में यह भी कहा है कि वे पहले भी गुणवत्ता को लेकर केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली की निगरानी में जांच कराने की मांग कर चुकी है। उन्होंने मरम्मत के नाम पर दो बार में करोड़ों रुपये खर्च होने तथा कार्यों के बदले हुए भुगतान और गुणवत्ता की विजलेंस से जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।