फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी करने वाली शिक्षिका के फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ गुमनाम शिकायती पत्र ने कर दिया। बताया जाता है यह गुमनाम पत्र कन्नौज जिले के ही किसी जानकार द्वारा ही भेजा गया था। गुमनाम पत्र मिलते ही शिक्षिका के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो गई थी।
तीन सदस्यीय टीम ने शिक्षिका के अभिलेखों की जांच की। साल 2002 के कार्यकाल के दौरान कन्नौज जिले में बीएसए रहे कामताराम पाल फिलाहल विंध्याचल मंडल के संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) के पद पर तैनात हैं। अप्रैल माह में जेडी कामताराम पाल के दफ्तर में एक गुमनाम शिकायती पत्र डाक के जरिये पहुंचा।
इसमें लिखा गया था कि लंदन में रहने वाली प्रियंका के फर्जी दस्तावेज लगाकर कन्नौज जिले की एक अन्य प्रियंका नाम की लड़की फर्जी तरीके से नौकरी कर रही है। गुमनाम पत्र मिलने के बाद सहायक अध्यापिका की सेवा पुस्तिका में दर्ज पते पर जेडी दफ्तर की ओर से एक सत्यापन पत्र डाक के जरिये भेजा गया।
सत्यापन पत्र डाक के जरिये लंदन में रह रही प्रियंका प्रजापति के पिता डॉ. मनोज कुमार के घर पहुंचा। तब जाकर फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ। डॉ. मनोज कुमार की बेटी प्रियंका कई वर्षों से लंदन में रह रही है। मनोज कुमार ने कन्नौज एसपी को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की जानकारी दी और फर्जी दस्तावेजों के जांच कराने की मांग की। फर्जी प्रमाण पत्रों पर नौकरी करने की पुष्टि होने पर नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।