परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी से जिला जूझ रहा है। शिक्षकों की कमी से पठन पाठन प्रभावित हो रहा है। 2110 परिषदीय स्कूलों मेें लगभग दो लाख 92 हजार 882 बच्चों पर आठ हजार शिक्षक तैनात हैं, जबकि नियमानुसार प्राथमिक में 30 पर और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 35 बच्चों पर एक शिक्षक की तैनाती होनी चाहिए। वहीं परिषदीय स्कूलों में तैनात शिक्षक पढा़ने की बजाय एमडीएम, ड्रेेस, फल और दूध वितरण तक सीमित रह गए हैं। इससे शिक्षा के स्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है।
सर्वशिक्षा अभियान के तहत सरकार बच्चों को शिक्षित करने की कवायद कर रही है। शिक्षा पर सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किया जा रहा है। बावजूद इसके आज भी परिषदीय स्कूलों में मानक के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती नहीं की जा सकी है। बता दें कि जिले में 1611 प्राथमिक और 599 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं, जिसमें 2157 स्कूल ग्रामीण क्षेत्र में और 53 स्कूल शहरी क्षेत्र में स्थित हैं। परिषदीय विद्यालयों में लगभग दो लाख 92 हजार 882 बच्चे अध्ययनरत हैं, जिसमें से प्राथमिक विद्यालय में दो लाख 22 हजार 500 तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 70 हजार 382 बच्चे अध्ययनरत हैं।
शिक्षकों की कमी के चलते बच्चों को समुचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है। विभाग की मानें तो लगभग आठ हजार शिक्षक ही तैनात हैं, जिसमें से 2333 शिक्षामित्रों को शिक्षक पद पर समायोजित किया गया है। वहीं 735 अनुदेशक भी बच्चों को शिक्षित करने में सहयोग प्रदान कर रहे हैं, जिससे परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था में थोड़ा सुधार हुआ है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत मानक पूरा करने के लिए प्राथमिक विद्यालय में 30 बच्चों पर एक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 35 बच्चों पर एक शिक्षक की तैनाती होनी चाहिए।