फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

साहित्य जगत के अमर शिल्पी थे कुशवाहा कांत

विज्ञापन
विज्ञापन
मिर्जापुर। महुवरिया स्थित एक विद्यालय में बुधवार को हिंदी साहित्य के रचनाकार कुशवाहा कांत की 102वीं जयंती मनायी गई। इस अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि कुशवाहा कांत हिंदी साहित्य जगह के अमर शिल्पी थे।
विज्ञापन

मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार गणेश गंभीर ने कहा कि कुशवाहा कांत 30 वर्ष की उम्र में ही कई दर्जन राजनीतिक, सामाजिक, तिलस्मी व क्रांतिकारी साहित्य की रचना कर अमर हो गए। कहा कि कुशवाहा कांत पर विश्वविद्यालयों मे शोध होना चाहिए। अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार भोलानाथ कुशवाहा ने कहा कि कुशवाहा कांत कालजयी रचनाकार थे। लालरेखा, लालकिले की ओर व विद्रोही सुभाष जैसे उपन्यास लिखकर वे अमर हो गए। साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित अजीता श्रीवास्तव ने उनको अमर साहित्यकार बताया। संचालन शुभम श्रीवास्तव ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक बलवंत सिंह मौर्य ने किया। गुमनाम मिर्जापुरी, इरफान कुरैशी, श्यमा अचल, नंदिनी वर्मा, प्रवीण कुशवाहा, अनिल कुमार मौर्य, धर्मेंद्र कुमार बिंद आदि थे।
वक्त के साथ बच्ची बड़ी हो गई
मिर्जापुर। इस अवसर पर एक काव्य गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। गणेश गंभीर ने सुनाया, वक्त के साथ बच्ची बड़ी हो गई, नर्म थी धूप जो अब कड़ी हो गई। भोलानाथ कुशवाहा ने सुनाया, याद रखो, हम संपूर्ण होते हैं। एक साथ मिलकर । शुभम श्रीवास्तव ने सुनाया, वस्तुनिष्ठता सघन हुई, हम विकल्पहीन हो रहे। गुमनाम मिर्जापुरी ने सुनाया, गुमनाम चलता है मरने के बाद भी। नंदिनी वर्मा ने सुनाया, मुकुट ये हिंद का, हम हिंद से अलग होने देंगे नहीं। श्याम अचल ने सुनाया, एक राज दुलारे बेटे को तुम अपने गोद में उठा लेना।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें