मिर्जापुर। भारत सरकार की ओर से मिक्सो पैथी को अनुमति दिए जाने के बाद से एलोपैथी के डाक्टर फैसले का विरोध कर रहे। इसके लेकर सोशल मीडिया पर भी आयुर्वेद और एलोपैथ के चिकित्सकों में बहस तेज हो गई है। सरकार के फैसले का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भी विरोध कर रहा। मंगलवार को दो घंटे ओपीडी बंद कर काली पट्टी बांध कर विरोध जताया गया था। अब 11 दिसंबर से 12 घंटे के लिए ओपीडी बंद करने का आईएमए ने आह्वान किया है। वहीं, आयुर्वेदिक चिकित्सकों को कहना है कि आयुर्वेद विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है। एलोपैथी जैसी पाश्चात्य चिकित्सा पद्धति के विकास के पूर्व आयुर्वेद ही जन-जन की चिकित्सा का साधन रहा। आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने न केवल गंभीरतम रोगों का उपचार किया अपितु अपनी वैज्ञानिक दृष्टि एवं शरीर रचना संबंधी गहन अध्ययन के आधार पर विविध शल्य क्रियायें भी संपादित की। कर्ण-नासा संधान जैसे सफल प्रयोगों के कारण ही आधुनिक चिकित्सक भी आचार्य सुश्रुत को ‘फ़ादर ऑफ सर्जरी’ कहते हैं।
मिक्सो पैथी यानी एक पद्धति के चिकित्सक को दूसरी पद्धति के कार्य करने की अनुमति देना चिकित्सा के स्तर व उसकी गुणवत्ता को कम करना है। आयुर्वेदिक चिकित्सकों को सरकार ने सर्जरी की इजाजत तो दे दी है, लेकिन जिस विधि को सीखने में सालों लग जाते हैं। वह कुछ महीनों की ट्रेनिंग से कैसे सीखी जा सकती है। आयुर्वेद में तो एनेस्थिसिया की पढ़ाई भी नहीं है, तो बिना बेहोशी के सर्जरी कैसे होगी। कोई भी पद्धति बुरी नहीं होती है। शरीर के हर अंग की सर्जरी करने के लिए विशेषज्ञ होते हैं। मिक्सो पैथी में यह मुश्किल होगा। ऐसे में सरकार को चाहिए की आयुष पद्धति को अलग से विकसित करेें। 11 दिसंबर से 12 घंटे ओपीडी बंद कर विरोध जताया जाएगा।
-डॉ. एसएन पाठक, वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ, आईएमए-सचिव
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के उपकरण आयुर्वेद की ही देन हैं। कोरोना संक्रमण में आयुर्वेद ने लोगों को बचाया। सरकार ने आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सकों को सर्जरी की अनुमति दी है। ये अच्छा कदम है। एलोपैथी में महंगा इलाज होता है। उनको डर है कि आयुर्वेद में सस्ते में उपचार होगा। इससे उनको नुकसान होगा। सर्जरी करने के लिए आयुर्वेद के चिकित्सक भी प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। ऐसा भी नहीं है कि अभी जो आयुर्वेद के चिकित्सक है, वे सर्जरी करने जा रहे है। इसके लिए नए बैच में शैल्य में एमएस और शालाक्य की डिग्री लेने वाले चिकित्सक प्रशिक्षण के बाद ही सर्जरी करेंगे। साथ ही आठ प्रकार के शस्त्र कर्म एवं अनेक प्रकार के शल्य कर्म, फ्रैक्चर का उपचार, पेट, नाक, कान, आंख आदि के शल्य भी आचार्य सुश्रुत ने हजारों वर्ष पहले ही बताया है।
- डॉ. अवनीश पांडेय, आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी, उत्तर प्रदेश सरकार