ख्वाजा इस्माइल चिश्ती के सालाना उर्स के दूसरे दिन जायरीनों का हुजूम उमड़ पड़ा। कंतित शरीफ के दरबार में देश के कोने-कोने से पहुंचे जायरीनों ने अकीदत के साथ चादरपोशी कर दुआएं मांगी।
मेला परिसर में लगे तरह-तरह के झूलाें पर झूल कर लोगों ने खूब आनंद उठाया, वहीं दुकानाें पर जुटी भीड़ को देख दुकानदार भी गदगद दिखाई दिए।
मन्नतें और मुरादें लेकर रविवार को कंतित शरीफ के दरबार में पहुंचे जायरीनों ने अकीदत के साथ चादरपोशी कर दुआएं मांगी। मजार पर चादरपोशी और गुलपोशी का सिलसिला सुबह से लेकर देर रात तक अनवरत चलता रहा।
शनिवार की रात को जगमग रोशनी से पूरा मेला परिसर जगमगा रहा था, वहीं रविवार की सुबह से ही कंतित शरीफ के दरबार में मन्नतें मांगने के लिए जायरीनों का तांता लगा रहा।
महिला-पुरुष जायरीनों के साथ ही बड़ी संख्या में बच्चे व बालिकाएं भी पहुंची हुई थीं। मेला परिसर में लगी सिन्नी और चादर की दुकानाें पर उमड़े जायरीनों को देख दुकानदार भी गदगद नजर आ रहे थे।
बच्चाें ने तरह-तरह के खिलौने आदि खरीदने के बाद झूला झूल कर मेले का खूब आनंद उठाया, वहीं बड़ाें ने खान-पान की दुकानों पर पहुंच कर व्यंजनों का स्वाद लिया।
चुनार की बिस्किट और मेरठ का हलवा जायरीनों को खूब भा रहा है, वहीं पकौड़ी सहित कई अन्य खान-पान की दुकानाें पर जायरीनाें की भीड़ सुबह से देर रात तक जुटी रही।
चिलचिलाती धूप में मेला परिसर में छावनी की व्यवस्था नहीं होने से जायरीन पेड़ का सहारा लेने को मजबूर हैं। पूरे मेला क्षेत्र में सिर्फ एक ट्यूबवेल है, जो जायरीनों की प्यास को नहीं बुझा पा रहा है।
उधर कंतित शरीफ के सालाना उर्स के पूर्व तैयारियाें को लेकर जिलाधिकारी ने बैठक कर व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने का निर्देश दिया था, लेकिन उनके निर्देशाें का पालन नहीं हो पा रहा है, जिससे जायरीनाें को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
चिलचिलाती धूप में मेला परिसर में छावनी की व्यवस्था नहीं होने से जायरीन पेड़ का सहारा लेने को मजबूर हैं। साफ-सफाई नहीं होने से जायरीन परेशान है।