जिला विज्ञान क्लब की ओर से मंगलवार को को विश्व जूनोसिस दिवस पर कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें बाल वैज्ञानिकों सहित 48 लोगों ने प्रतिभाग किया। कहा गया कि इस दिवस का उद्देश्य ऐसे बीमारियों के प्रति जागरूकता पैदा करना है जो जानवरों से इंसानों में फैलती है और जानलेवा साबित हो सकती है। जिला समन्वयक सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि जूनोसिस एक ग्रीक शब्द है जो जून और नोसिस से मिलकर बना है। जून का अर्थ जानवर तथा नोसिस का अर्थ बीमारी से है। इसका शाब्दिक अर्थ पशु जनित रोग से है। विश्व जूनोसिस डे का उद्देश्य यह है कि हम लोग जो अपने घरों में पालतू पशु जैसे कुत्ता, बिल्ली, मछली, सूअर, मुर्गी और घोड़ा पालते हैं उन्हें अपने हाथों से खिलाते हैं। उनसे दूरी बनाने की जरूरत है। वेटनरी वैज्ञानिक डॉ बीके प्रसाद ने बताया कि पालतू पशु को घर में पालना तो अच्छी बात है परंतु इनसे दूरी भी बना कर रखना जरूरी है क्योंकि इनसे संक्रामक बीमारियां फैलने के खतरे होते हैं।
सौ से ज्यादा जूनोटिक बीमारियां
वेटनरी चिकित्सक डॉ प्रभात ने बताया कि दुनिया भर में सौ से ज्यादा जूनोटिक बीमारियां हैं जो जानवरों से इंसानी शरीर में पहुंचती है। पालतू जानवरों को छूने के बाद हमेशा साबुन से हाथ धोएं, समय समय पर उनका टीकाकरण कराएं, पशुओं को पेट में कीड़े मारने वाली दवा दें, पालतू जानवरों को बिस्तर से दूर रखे तभी इस जंतु जनित रोग से बच सकेंगे। अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार प्रकट किए।