मंगलवार की सुबह कंतित शरीफ दरगाह परिसर में कुल शरीफ की फातिया के साथ सालाना उर्स का समापन हो गया। इस अवसर पर कुरानख्वानी व तकरीर हुई तथा नात शरीफ पढ़ी गई।
कंतित शरीफ के दरगाह पर चादरपोशी कर दुआएं मांगने वाले जाइरीनों का तांता लगा रहा। बिजली की जगमग रोशनी से नहाया मेला क्षेत्र का नजारा देखते ही बन रहा था।
झोली फैलाने वालों की मुरादें कंतित शरीफ के दर पर अवश्य पूरी होती है। यही आस लेकर ख्वाजा इस्माइल चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के सालाना उर्स के अंतिम दिन जाइरीनों का हुजूम उमड़ पड़ा।
कंतित शरीफ के सालाना उर्स के अंतिम दिन मजार पर पूर्वांचल सहित विभिन्न प्रांताें से आए जाइरीनों ने अकीदत के साथ चादरपोशी कर दुआएं मांगी।
दरगाह पर चादर चढ़ाने और मन्नतें मांगने का सिलसिला सुबह से लेकर देर रात तक अनवरत चलता रहा। गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल कंतित शरीफ की दरगाह पर जाइरीनों ने चादर के साथ ही सिन्नी भी चढ़ाया।
मेला परिसर में सब्ज रंग के झंडे लगे वाहनाें की आवाजाही जारी रही। तपती दोपहरिया की परवाह किए बगैर जाइरीनों ने बाबा के दर पर जाकर हाजिरी लगाई। महिला, पुरुष, वृद्ध एवं बच्चे सभी बाबा के दर पर मत्था टेकने के लिए कतार में लगे हुए थे। जाइरीनों की खिदमत और सवाब की गरज से कई स्वयं सेवी संस्थाआें द्वारा लंगर सहित शीतल पेयजल व शरबत के स्टाल लगाए गए थे।
उर्स मुबारक के मौके पर पूरे मेला क्षेत्र की रंग-बिरंगे विद्युत झालरों से की गई आकर्षक सजावट देखते ही बन रही थी। मेले में जाइरीनों की उमड़ी भारी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए थे। मेले में लगे झूलाें पर झूल कर बच्चों ने खूब आनंद उठाया, वहीं महिलाओं व पुरुषों ने मेला में भ्रमण कर अपनी जरूरत की वस्तुआें की जमकर खरीददारी की।