चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन सोमवार को विंध्य दरबार में देवी भक्ताें की भीड़ उमड़ पड़ी। मां की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालु लालायित दिखे।
विंध्यधाम की गलियाें में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रही। पावन दरबार में भोर से लेकर देर रात तक दर्शनार्थियाें का तांता लगा रहा।
तल्ख धूप के परवाह किए बगैर नर-नारियों ने माता के दरबार में बड़े ही श्रद्धाभाव से मत्था टेका।
मेला जोनल मजिस्ट्रेट डा. विश्राम ने बताया कि सोमवार को देर रात तक करीब सवा चार लाख दर्शनार्थियों ने विंध्यधाम में दर्शन-पूजन किया।
विंध्य दरबार में भोर में मंगला आरती बाद शुरु हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला देर रात तक कमजोर नहीं पड़ा।
बीच-बीच में मां विंध्यवासिनी की भव्य आरती व पूजन के समय कपाट बंद रहे, लेकिन आरती होने के बाद थमी लाइनें पुन: चलने लगी। माता का जयकारा लगाते श्रद्धालुओं के कदम मंदिर की तरफ बढ़े चले जा रहे थे।
गुड़हल के माला-फूल और नारियल-चुनरी के साथ ही रोरी-रक्षा, कपूर-धूपबत्ती लेकर श्रद्धालु विंध्याचल धाम पहुंचे, जहां मां के भव्य स्वरूप का दर्शन पाकर भक्तजन निहाल हो उठे।
आस्थावानाें ने जगत जननी का विधिवत दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि के लिए कामना की।
मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु नंगे पांव ही पैदल त्रिकोण परिक्रमा कर अष्टभुजा, कालीखोह, मां तारा देवी एवं भैरव बाबा मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजन-अर्चन किया।
दर्शन-पूजन करने के बाद महिला-पुरुष भक्ताें ने विंध्य की गलियाें में सजी दुकानाें से अपनी-अपनी जरुरत की वस्तुओं की जमकर खरीदारी की।
विंध्याचल के न्यू वीआईपी रोड के साथ ही पुरानी वीआईपी, विंध्याचल की थाना गली, बच्चा पाठक की गली, जैपुरिया गली, पक्काघाट गली दर्शनार्थियाें से पटी रही।
भक्ताें की सुविधा के लिए विभिन्न जनपदाें से तैनात किए गए पुलिस व पीएसी बल और स्काउट-गाइड सहित श्री विंध्य पंडा समाज के लोग भी मेले की व्यवस्था में सहयोग देेते नजर आए।