शेरवां। पहली बार वर्ष 2015 में विकास खंड जमालपुर के ब्लाक प्रमुख का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुआ। लेकिन यह कार्यकाल काफी उतार चढ़ाव भरा रहा। किसी भी राजनैतिक पंडित को अंदाजा नहीं था कि इतना संघर्षपूर्ण कार्यकाल बीतेगा। इस दौरान अविश्वास प्रस्ताव से लेकर उपचनुनाव हुए। पांच साल में दो प्रमुख बने।
वर्ष 2015 -16 का ब्लाक प्रमुख का कार्यकाल खत्म हो चूका है। वर्ष 2016 में ब्लाक प्रमुखी के लिए अनुसूचित जाति से समाजवादी पार्टी की ओर से समर्थित छोटा मिर्जापुर के क्षेत्र पंचायत सदस्य संजय सोनकर व निर्दलीय उम्मीदवार गौरी- गुलौरी के क्षेत्र पंचायत सदस्य अमित कुमार के बीच रोमांचक मुकाबला हुआ था। संजय सोनकर ने अमित कुमार को मात्र दो वोटों से हराया था। लेकिन वह ज्यादा दिन प्रमुख पद पर नहीं रहे। अमित कुमार ने एक बार फिर जोर लगाया। मात्र डेढ़ साल बाद 12 जुलाई 2017 को संजय सोनकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रखा। इस तरह संजय प्रमुख पद से अपदस्थ हो गए। 25 मार्च 2018 तक उपजिलाधिकारी को चुनार को प्रशासक नियुक्त किया गया। छह माह बाद उप चुनाव का समय मुकर्रर किया गया। इस बीच संजय सोनकर ने अमित कुमार के खिलाफ गलत जाति प्रमाणपत्र लगाकर क्षेत्र पंचायत सदस्य व प्रमुख का चुनाव लड़ने का आरोप लगाया। 3 मार्च 2018 को अमित कुमार का जाति प्रमाणपत्र रद करते हुए उपचुनाव में दावेदारी करने से जिलाधिकारी ने रोक लगा दी। हालांकि उपचुनाव हुआ। संजय सोनकर संग महुली की क्षेत्र पंचायत सदस्य आभा देबी, ढेलवासपुर ककरही के क्षेत्र पंचायत सदस्य बृजमोहन सरोज ने भाग्य आजमाया। बृजमोहन सरोज को 73 मत प्राप्त कर जीते। वर्तमान में चुनाव के मद्देनजर सरगर्मी बढ़ी हुई है। 120 क्षेत्र पंचायत सदस्य वाले विकास खंड जमालपुर से पिछड़ा वर्ग से पूर्व प्रमुख से लेकर पिछड़े नेता व विभिन्न दलों के राजनैतिक पंडित अपना-अपना दांवपेच लगाना शुरू कर दिए हैं।