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पत्नी के मां बनने की लालसा पूरी करने के लिए किया था अपहरण

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मिर्जापुर। पड़री थाना क्षेत्र के सिकरी गांव से दो माह पूर्व अपहृत आठ माह के सागर को काफी मशक्कत के बाद पुलिस और एसओजी की टीम ने बरामद कर लिया। बालक के अपहरणकर्ता ने पत्नी की मां बनने की इच्छा को पूरा करने के लिए अपनेे किशोर भाई के साथ मिलकर बालक का अपहरण किया था। पुलिस ने शुक्रवार को डगमगपुर चौराहे के पास से 10 माह के बालक को बरामद करने के साथ ही आरोपी और उसके भाई और पत्नी को गिरफ्तार किया गया।
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मामले का खुलासा पुलिस अधीक्षक डा. धर्मवीर सिंह ने पुलिस लाइन स्थित मनोरंजन कक्ष में किया। बताया कि क्षेत्र निवासी धर्मराज की मां 17 दिसंबर 2019 को उसके दो पुत्रों के साथ दुकान में थी। शाम को बाइक सवार दो लोग दुकान में आए और आठ माह के सागर का अपहरण कर ले गए। आठ माह के बालक का अपहरण होने से पुलिस सकते में आ गई। पुलिस ने छानबीन शुरू किया, पर कोई सुराग नहीं मिला।
बालक को बरामद करने के लिए एसपी ने पड़री पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच की स्वाट टीम को लगाया। स्वाट टीम ने कई जगहों पर छानबीन किया, पर कुछ पता नहीं चला। बालक के बरामद न होने पर पुलिस पर दबाव बढ़ता चला जा रहा था। इस बीच पुलिस को तथ्यों का पता चला। जिससे बालक के अपहरण करने के बारे में जानकारी पता चली।
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तथ्यों के ऊपर काम करते हुए थानाध्यक्ष मंजय सिंह, स्वाट टीम से एसआई जयदीप सिंह, नितिन सिंह, अजय यादव ने डगमगपुर चौराहे से अपहरणकर्ता शंकर चौहान पुत्र पत्तेलाल निवासी देवापुर पचवल कोतवाली देहात उसकी पत्नी सोना उर्फ शिवानी पत्नी शंकर चौहान और उसके 14 वर्षीय भाई को गिरफ्तार किया। सोना उर्फ शिवानी के पास से अपह्रत बालक सागर को बरामद करने के साथ अपहरण में प्रयुक्त बाइक को भी बरामद कर लिया। एसपी ने अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार करने वाली टीम को 10 हजार रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की।
ऐसे साजिश रचकर किया अपहरण
मिर्जापुर। एसपी डा. धर्मवीर सिंह ने बताया कि अपहरणकर्ता शंकर चौहान पड़री के अघवार में दिनेश चंद्र केशरवानी के दुुकान पर रहकर हलवाई का काम करता था। अघवार में ही किराए के मकान में रहता था। उसकी पत्नी सोना उर्फ शिवानी को किसी डाक्टर ने बताया कि उसे बच्चा पैदा नहीं होगा। वह बार-बार पति से बच्चे की मांग करती थी। शंकर अपने नाबालिग भाई के साथ सिकरी गांव में रेकी करते हुए धर्मराज के दुकान पर गुटखा लेने गया था।
उसी समय धर्मराज की मां उसके दोनों बच्चों को लेकर दुकान में आई। कुछ सामान लेनेे के लिए धर्मराज की मां अंदर गई, तभी अपहरणकर्ता शंकर अपने भाई के साथ बच्चे को शाल में लपेट का फरार हो गया। पहले वह बच्चे को लेकर विंध्याचल कमरा लेकर रहा। इसके बाद शहर कोतवाली के रमईपट्टी में रहने लगा। इस बीच शंकर ने अपने परिचितों में खबर फैला दिया कि उसकी पत्नी को बच्चा हुआ है। हलवाई दिनेश का पैसा शंकर पर बकाया था। इसलिए हलवाई शंकर का पता करते हुए रमईपट्टी कमरे पर पहुंचा। उसने शंकर से कहा कि उसके बच्चे के लिए मिठाई और कपड़ा लाया है, बच्चे को लेकर आए। एक घंटा बीतने के बाद भी शंकर बच्चे को लेकर बाहर नहीं आया।
मकान मालिक के लड़के ने कहा कि बच्चा न दिखने पर क्यों परेशान हो तो हलवाई दिनेश ने बताया कि उसे बच्चा नहीं हो रहा था। दो माह पूर्व बच्चा हुआ है। इसलिए देखना चाहता हूं। तब मकान मालिक के लड़के ने बताया कि उसका पुत्र तो आठ से नौ माह का है। इस पर दिनेश को शंका हुुआ। हलवाई दुकान पर आकर चर्चा करने लगा और पुलिस को सूचना दिया। हलवाई के जाने के बाद शंकर रमईपट्टी का मकान छोड़कर वाराणसी पहड़िया में जाकर किराए पर रहने लगा। पुलिस को सूचना हुई तो वह वाराणसी से आ रहा तो डगमगपुर के पास से पकड़ा गया।
भाई की पत्नी से हुई मोहब्बत, फिर की शादी
पड़री। शंकर चार भाई है। पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। तीन माह पूर्व शादीशुदा बहन अंजना की भी बीमारी से मौत हो गई थी। बड़ा भाई रुपेश महाराष्ट्र में सोना उर्फ शिवानी से डेढ़ वर्ष पूर्व शादी कर घर लाया था। कुछ दिन बाद दोनों में विवाद होने लगा। इस बीच नजदीकियां बढ़ने पर सोना को रुपेश के छोटे भाई शंकर से प्यार हो गया। रुपेश काम करने गुजरात चला गया। शंकर ने सोना से शादी कर ली।
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