यह कोयले की आवाजाही के लिए ट्रंक मार्ग के रूप में भी कार्य करता है, यहां उत्तरी कोयला क्षेत्रों (एनसीएल) में अधिकतम कोयले लोडिंग हो रही है, इसलिए कोचिंग ट्रेनों के समय पालन को प्रभावित किए बिना कोयला रैक की गतिशीलता बढ़ाने के लिए ये प्रयोग किया गया।
रागिनी सिंह ने बताया कि पिनाका को शनिवार की शाम 6.20 बजे चुनार से रवाना किया गया। उसे चोपन में पूर्व मध्य रेलवे को सौंप दिया गया। जिसमें से दो भाग को शक्तिनगर साइडिंग व दो को कृष्णशिला साइडिंग में कोयला लोडिंग के लिए भेजा गया। पारम्परिक रूप से उत्तर मध्य रेलवे में टुंडला, खुर्जा, झांसी और बाद (मथुरा के पास) जैसे स्थानों से दो ट्रेनों की लांग हॉल बनाई जाती रही है। पिनाका सीरीज के ये ट्रायल आगे भी