बेलतर स्थित पंजाब नेशनल बैंक के बाहर उमड़ी भीड़।
पैसा जमा करना है तो ठीक लेकिन करेंसी बदलनी है तो बैंकों का रुख करना अभी ठीक नहीं है। अधिकांश बैंकों ने दो घंटे करेंसी बदलने के बाद ही अपने यहां करेंसी नहीं होने का बोर्ड लगा दिया। बैंकों में उपभोक्ताओं के साथ दुर्व्यवहार की भी शिकायतें मिलीं। रात आठ बजे तक बैंक खुलने के दावों की हवा भी निकल गई जब पांच बजते बजते बैंकों के दरवाजों पर ताले लटक गए।
महंगाई के इस युग में चार हजार रुपये होते ही कितने हैं। इससे तो एक दिन का काम ही किसी प्रकार चल पाया। किसी के घर सब्जी समाप्त हो गई है तो किसी को जरूरी काम से, दूसरे शहर जाना है। किसी के घर में लोग बीमार हैं जिन्हें दवाइयों की सख्त जरूरत है लेकिन बैंक हैं कि लोगों को अपना ही धन नहीं लौटा पा रहे हैं। शुक्रवार को भी बैंकों के बाहर गुरुवार वाली स्थिति ही देखने को मिली। लंबी लाइनों के बाद जब लोग बैंक में प्रवेश प्राप्त कर रहे थे तो वहां यह बताया जा रहा था कि छोटी करेंसी समाप्त हो गई है।
बैंक केवल पैसे जमा करने के लिए ही खुले हैं। इतना सुनते ही उपभोक्ता गरम हो जा रहे थे। सुबह कुछ ही लोगों को चार हजार रुपये सौ रुपये की करेंसी में मिल सके। इसके बाद बैंकों में छोटे नोट समाप्त हो गए। दवा की दूकान चलाने वाले कृष्ण जी दूबे बरियाघाट स्थित यूनियन बैंक पहुंचे थे लेकिन उन्हें मैनेजर ने बताया कि पैसे समाप्त हो गए हैं।
उन्होंने बताया कि दूकान पर ग्राहक आ नहीं रहे हैं। घर में सब्जी नहीं है। मेरा एकाउंट इस बैंक में 35 वर्षों से है। मेरा विश्वास था कि यहां आज जरूर पैसा मिल जाएगा लेकिन विश्वास टूट गया। कोन ब्लॉक में इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, इलाहाबाद बैंक, चेतगंज, जिला सहकारी बैंक तिलठी में भी ग्राहकों को पैसा नहीं मिल पाया। यूपी ग्रामीण बैंक के मैनेजर प्रहलाद यादव ने बताया कि करेंसी की नई खेप नहीं आ सकी है। पैसे समाप्त हो गए हैं। कई बैंकों में तो उपभोक्ताओं को एक हजार रुपये ही दिए गए।