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Mirzapur News: ससुराल वालों की फरमाइश नई दुल्हनों के लिए बन जा रहा अवसाद

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शादी के बाद ससुराल में मनमुताबिक माहाैल न मिलने पर दुल्हनें मानसिक रुप से बीमार हो जा रही है। ससुराल वालों से तालमेल न बैठने पर वे एडजस्टमेंट डिस ऑर्डर नामक मानसिक बीमारी ग्रसित हो जा रही हैं। उन्हें घबराहट, बेचैनी महसूस हो रहा है। ससुराल वालों की फरमाइश नई दुल्हनों के लिए अवसाद बन जा रहा है। मेडिकल काॅलेज के मानसिक रोग विभाग में आने वाली 10 में से सात नई दुल्हनें एडजस्टमेंट डिस ऑर्डर बीमारी से ग्रसित है। इनकी काउंसिलिंग की जा रही है। उन्हें जरुरी दवाएं दी जा रही हैं। मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग की एचओडी डाॅ. पूजा सिंह ने बताया कि पहले के समय में महिलाओं में सहनशक्ति ज्यादा होती थी। उन्हें भी इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता था, परंतु वे सह लेती थीं। नई दुल्हनों में सहनशक्ति कम है। वे ससुराल में कोई झुकने को तैयार नहीं है। अब ससुराल का स्वरुप भी बदल गया है। यही कारण है कि नई दुल्हनें मानसिक बीमारी की चपेट में आ जा रही हैं। नई दुल्हनें संयुक्त परिवार में काम का दबाव नहीं झेल पा रही हैं। सास की फटकार पर असहज हो जा रही है। कई मामलों में शादी के एक-दो माह बाद पति के बाहर चले जाने पर नई दुल्हनें ससुरालवालाें से अपनी समस्याएं नहीं बता रही हैं। कोई पति के अपनी मां का पक्ष लेने और तो कोई ननद के व्यवहार से परेशान है। डाॅ. पूजा ने बताया कि ओपीडी में प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज आते है। इसमें 50 के करीब महिलाएं रहती हैं। इसमें 10 नई दुल्हनें भी रहती है। जिनकी शादी एक-दो माह से लेकर एक साल पहले हुई रहती है।
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ये हैं लक्षण
नींद कम आना, सिर दर्द होना, बेहोश होना, आईब्रो के ऊपर दर्द होना, घबराहट, चिड़चिड़ापन एडजस्टमेंट डिस ऑर्डर के लक्षण हैं। 24 वर्षीय युवती की शादी चार माह पहले हुई। मायके में थी तो खाना बनाना नहीं सीखा था। शादी से पहले उसकी मां ने सिखाने का प्रयास किया पर वह खाना बनाने में दिलचस्पी नहीं लेती थी। अब शादी के बाद ससुराल गई तो वहां पर लोग तरह-तरह की फरमाइश करते हैं। सही खाना न बना पाने पर ताना मिलता है। ताना सुनने के बाद उसे सिरदर्द और बेचैनी होने लगता है। एक युवती की शादी एक वर्ष पहले हुई है। शादी के एक वर्ष होने के बाद भी बिना सास की आज्ञा के वह घर में कोई काम नहीं कर पाती। वह खाने कुछ बनाती है तो सास उसमें कमी निकाल देती है। वह मायके में बताती है तो मायके वाले एडजस्ट करने को कहते है। पति भी मां की बात को इग्नोर करने को कहता है। इस कारण उसे घबराहट, बेचैनी, नींद न आने, सिर दर्द की समस्या हो रही है। एक युवती की शादी आठ माह पहले हुई है। वह मायके में सिर्फ फास्ट फूड खाती थी। बाहर से फास्ट फूड ऑर्डर करती थी। घर पर भी वही बनाती थी। ससुराल में दाल-चावल, रोटी सब्जी बनाने में परेशानी हो रही है। इस पर ससुराल वाले कुछ कहते है तो विवाद होता है। जिसके बाद वह अवसाद में चली जाती है। शादी को डेढ़ वर्ष हो गया है। ससुराल में जो भी बात होती है। वह मायके में शेयर करती है। फोन पर सारी बात बताती है। मायके वाले जो राय देते है। वह उसे ससुराल में अपनाती है। इस कारण वह परिवार में सामंजस्य नहीं बैठा पा रही है। ससुराल वाले कुछ कहते है तो वह बीमार हो जाती है। डाॅ. पूजा सिंह, एचओडी, मानसिक रोग विभाग, मेडिकल कालेज ने बताया कि नई दुल्हनें ससुराल में परिवार के लोगों के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पाने के कारण एडजस्टमेंट डिस ऑर्डर की समस्या ग्रसित हो जा रही है। दोनों पक्षों की काउंसिलिंग कर उनको समझाया जाता है। दुल्हन को बताया जाता है कि घर में उनकी बात कौन सुनता है, उससे अपनी बात कहें। नींद न आने और सिर दर्द आदि की दवा दी जाती है। सबसे जरूरी काउंसिलिंग ही है।
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ऐसे बैठाएं सामंजस्य
-पति को नई दुल्हनों को भावनात्मक आश्वासन प्रदान करना चाहिए।
-परिवार के सदस्यों को सहानुभूति रखनी चाहिए
-भावनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करना चाहिए।
- तनाव प्रबंधन की तकनीकी सीखें। तनाव होने पर गहरी सांस लें।
-ससुराल वालों को आलोचनात्मक टिप्पणी से बचना चाहिए।

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