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38 डिग्री तापमान से घर के बाहर निकलने से बच रहे

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मिर्जापुर। गुरुवार को अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। भीषण उमस और गर्मी से सुबह दस बजे के बाद ही बाहर निकलने से बचने लग रहे। शरीर भेदती सूर्य की तल्ख किरणों से लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। लोग जहां घरों में रहने को मजबूर हैं वहीं दोपहर में पशु पक्षी भी वृक्षों की ओट में छिपे रहते हैं। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के अधिकारी का कहना है कि अभी मौसम में तल्खी रहेगी।
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घरों में चल रहे कूलर, पंखे और एसी मानो काम ही नहीं कर रहे थे। इसके आगे बैठे लोग भी पसीने से सराबोर नजर आ रहे हैं। घरों से आवश्यक कार्य से निकले लोग मात्र कुछ दूरी तक चलने के बाद छांव की ओर भागते रहे । भीषण, गर्मी के चलते निजात पाने के तमाम उपाय काम नहीं कर रहे थे। उमस और गर्मी से शीतल पेय पदार्थो का बाजार में भले ही डिमांड बढ़ गया है। पर अधिकांश कोरोना महामारी को देखते हुए चिकित्सको से मिली एडवाइजरी के चलते इसके सेवन से लोग परहेज कर रहे हैं। रात मे यदि किसी मोहल्ले की बिजली गुल हो जाए तो वहां की स्थिति समझी जा सकती है। लोग छतों और सड़कों पर टहलकर रात व्यतीत कर रहे हैं। मौसम को देखते हुए लोगों की निगाहें मानसून की ओर टिकी हुई हैं।
घाघ भड्डरी की कहावत दे रही सूखा पड़ने के संदेश
शेरवां। मौसम का मिजाज आए दिन बिगडने से महा कवि घाघ-भड्डरी की कहावतें याद आ रही है। जिससे किसान आने वाले समय को लेकर चिंतित नजर आ रहें हैं। घाघ का कहना है कि रोहिणी बरसे मृग तपै अद्रा कुछ कुछ जाय, कहे घाघ सुन घाघनी स्वान न भात खाय। मतलब साफ है कि रोहिणी नक्षत्र में हल्की बारिश हो मृगशिरा नक्षत्र ऐसा तपे कि धरती का कलेजा सूख जाय, चारो तरफ धूल उड़े। अद्रा नक्षत्र में बारिश हो तो ऐसा अन्न उपजेगा की कुत्ता भी भात नहीं खाएगा। लेकिन मौसम का मिजाज ठीक विपरित चल रहा है। रोहिणी व मृगशिरा नक्षत्र की बारिश किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच रही हैं। बुधवार व गुरूवार को बारिश होने से किसान सूखा पड़ने की संभावना जता रहे हैं।
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वर्जन
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मानसून अपने समय से है। पिछले दो दिनो से वाराणसी, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र व भदोही में जारी उमस व गर्मी आज भी बरकरार रहेगी। किसान धान की डाली नर्सरियों की भराई रात में ही करें। ध्यान रखें कि सुबह खेतों में पानी न लगा रहे।
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-शिव मंगल सिंह, तकनीकि अधिकारी, ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, भू-भौतिकी विभाग बीएचयू वाराणसी।
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