दो महीने पहले युवक की मौत पर ऑन कैमरा बोला झोला छाप
संवाद न्यूज एजेंसी
पटेहरा। जब सरकारी और निजी अस्पताल में डिग्री वाले डॉक्टर मरीजाें की जान नहीं बचा पाते तो हम क्या कर लेंगे। यह बात कोई और नहीं बल्कि एक झोलाछाप का कहना है। वो भी ऑन कैमरा।
संतनगर थाना क्षेत्र के गोहिया चौराहे पर एक झोलाछाप बेधड़क दुकान चला रहा है। दो महीने पहले गोहिया स्थित इसी झोलाछाप के इलाज से एक युवक की मौत हो गई थी। इसके बाद उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। वह बड़े आराम से बृहस्पतिवार को मरीज देखता नजर आया। ऑन कैमरा जब संवाददाता ने उससे पूछा कि आप लोग डिग्री से इलाज करते हैं या प्रैक्टिस से, झोला छाप ने कहा- आप कौन हैं यह पूछने वाले, आप से क्या मतलब। जब संवाददाता ने फिर पूछा कि इलाज कर रहे हैं पैसे ले रहे हैं तो पूछा जाएगा न। फिर से संवाददाता ने उससे पूछा-दो महीने पहले आपके यहां इलाज करने से एक युवक की मौत हो गई थी। उस पर झोलाछाप ने कोई अफसोस नहीं किया। बल्कि कहा कि मरने को तो लोग सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में भी मर जाते हैं। जहां डिग्री लेकर डॉक्टर बैठे हैं। जब वो मरीज को नहीं बचा पाते तो हम लोग कैसे बचा लेंगे। यह कहानी क्षेत्र के एक झोलाछाप की है। ऐसे पूरे जिले में न जाने कितने होंगे।
पटेहरा ब्लॉक क्षेत्र के दीपनगर में सात, पटेहरा में चार, कुहूँकि में तीन, घोरी में तीन, रामपुर में दो, पड़रिया में तीन, सिरसी में तीन, लेदुकी में दो, संतनगर में आठ, पथरौर में तीन, अमोई पुरवा में तीन, अमोई 84 में चार, सुगापाख में छह झोलाछाप सक्रिय हैं। पटेहरा चौराहे पर चार महीने पूर्व झोलाछाप के खिलाफ गलत इलाज करने की शिकायत की गई थी। जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इनसेट
नोटिस, सील फिर सेटिंग के बाद खुल जाती हैं दुकानें
जिले में झोलाछाप की दुकानें वर्षो से चल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर कार्रवाई भी करता है पर दुकानें फिर से खुल जाती हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अलग से झोलाछाप पर कार्रवाई के लिए अलग टीम बना रखी है। इसके लिए अलग से एसीएमओ की तैनाती की गई है, इसके बाद भी झोलाछाप पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। कारण कि शिकायत पर नोटिस जारी होता है, मामला बड़ा होने पर दुकान सील कर दी जाती है। इसके बाद भी सेटिंग से झोलाछाप दोबारा से दुकान खोल कर बैठ जाता है।
पटेहरा में पांच दुकाने सील करने के बाद फिर से खुल गईं
पटेहरा: पटेहरा में दो और दीपनगर में तीन झोलाछाप की शिकायत के बाद कार्रवाई करते हुए उन्हें सील किया गया था, पर कुछ दिन बाद ही सभी दुकानें फिर खुल गईं। उधर दूसरी ओर कलवारी के धुरकर,जमुई में झोलाछाप की भरमार है। नोटिस भी दिया गया था लेकिन उन पर कोई असर नहीं पड़ता है।
छह महीने पहले 14 महीने की बच्ची की हो गई थी मौत
मड़िहान : छह महीने पहले भावां में झोलाछाप के इलाज से गांव निवासी त्रिपुरारी विश्वकर्मा की 14 महीने की बेटी नव्या की मौत हो गई थी।जिसकी शिकायत पीड़ित ने मुख्यमंत्री पोर्टल, जिकाधिकारी, थाना राजगढ़ पर शिकायत की। स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए कुछ दिनों तक झोलाछाप का शटर बंद कराए रखा, कुछ ही दिनों बाद झोलाछाप की दुकान धड़ल्ले से चलने लगीं।
इलाज के नाम पर हर मरीज को चढ़ा देते हैं ड्रिप
चुनार। क्षेत्र में झोलाछाप मरीजों के इलाज के नाम पर सिर्फ आर्थिक शोषण करते हैं। इनके यहां पहुंचने वाले मरीज का इलाज बिना कोई जांच कराएं तत्काल शुरू कर दिया जाता है। इलाज के नाम पर उन्हें ड्रिप लगाकर तत्काल राहत का दिखावा करते हैं जब मरीज गंभीर हो जाता है तो उसे कही अन्यत्र जाकर इलाज कराने की राय देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। केस बिगड़ने पर मरीज की जान चली जाती है।
जिगना में दो तरीके से करते हैं इलाज
जिगना। छानबे क्षेत्र में झोलाछाप दो तरह से इलाज करते हैं। कुछ तो घूम-घूम कर अपने संपर्क वाले लोगों व अन्य का इलाज घर जाकर करते हैं। कुछ पॉली क्लीनिकल खोलकर इलाज करते हैं। मरीज को दवा देने के साथ ड्रिप जरूर चढ़ाते हैं। सबसे अधिक बंगाली झोलाछाप हैं।
हर ब्लॉक में है झोलाछाप की दुुकान
चील्ह। चील्ह चौराहे पर कई बिना अपंजीकृत अस्पताल हैं। यहां पर अल्ट्रासाउंड भी होता है। पुरजागीर बाजार में भी झोलाछापों की भरमार है। हनुमान नगर, चेतगंज बाजार में भी झोलाछाप मौजूद हैं। जमालपुर क्षेत्र के मठना, देवरिया, जमालपुर, बहुआर, डवक, ओड़ी, रामपुर, खेमई बरी में झोलाछाप दुकान खोलकर बैठे हैं।
मामूली बीमारी को बड़ा बताकर डराते हैं
सक्तेशगढ़। क्षेत्र के जौगढ़, रामपुर सक्तेशगढ़, बलुआ बजाहुर, खम्हवा जमती, लौहरा, तरंगा में दुकानें संचालित हैं। यह झोलाछाप मामूली बीमारी को भी बड़ा बताकर डराते हैं। विंध्याचल के अमरावती चौराहा, परम हंस देवरहा बाबा आश्रम रोड, शिवपुर हाईवे, शिवपुर बाजार, काली खोह मोड़ अष्टभुजा देवी मंदिर हाईवे गेट, रेहड़ा चुंगी, रोडवेज बस स्टैंड, बनारस बस स्टैंड, कतित मजार, दुधनाथ तिराहा, बरतर तिराहा, सगरा में झोलाछाप इलाज कर रहे हैं। सीखड़ क्षेत्र में झोलाछाप मामूली बीमारी को गंभीर बताकर मरीजों का आर्थिक शोषण करते हैं।
मरीज पकड़ने के लिए कई झोलाछाप सक्रिय
राजगढ़। क्षेत्र में तो झोलाछाप बाहर से चिकित्सक बुलाकर ऑपरेशन तक कराते हैं। कुछ इसलिए बैठे हैं कि कोई गंभीर मरीज आए तो उसे रजिस्टर्ड चिकित्सकों के भेजकर इलाज कराकर कमीशन ले सकें। कुछ आशा कार्यकर्ता भी मरीजों को कमीशन पर झोला छाप के यहां ले जाती हैं।
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वर्जन
शिकायत मिलने के बाद इस वर्ष 15 लोगों को नोटिस दिया गया है। तीन बार नोटिस जारी की जाती है। इसके बाद भी अवैध क्लीनिक या अस्पताल संचालन करने वालों पर कार्रवाई की जाती है। झोलाछाप के खिलाफ अभियान चलता रहता है। कार्रवाई की जाती है।
डॉ. अवधेश, एसीएमओ, नोडल अधिकारी
पटेहरा कला में मरीज देखता झोलाछाप, संवाद