मिर्जापुर। नगर के आवास विकास कालोनी में रविवार को साहित्य चेतना समाज के तत्वावधान में चेतना प्रवाह कार्यक्रम के अंतर्गत कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर अनुराधा ओस और हसन जौनपुरी को साहित्य के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए कलम श्री सारस्वत सम्मान से अलंकृत किया गया। नंदिनी वर्मा और रेखा चौरसिया के सरस्वती वंदना से काव्य पाठ का प्रारंभ हुआ। अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार गणेश गंभीर ने सुनाया, सूरज हूं सुबहो- शाम के तालों में कैद हूं, आकाश के पुराने कबालों में कैद हूं। लल्लू तिवारी ने सुनाया, नए वर्ष में सारी खुशियां मिलें आपको, शमन प्राप्त हो गत वर्षों के तमस ताप को। लालब्रत सिंह सुगम ने सुनाया, लाभ उलट दो भला हो, उलट जाए यदि नर्तकी, बन जाए कीर्तन। रविन्द्र पाण्डेय सरल ने सुनाया, अब अकेले ही रहने की आदत बनी। आनंद अमित ने सुनाया, न सूखेगा ये विंढमफॉल अब तो, मुझे इतना रुलाकर जा रही हो। श्याम अचल ने सुनाया - परिंदा चोंच भर पानी उठाकर समुद्र को सुखाना चाहता है। नंदिनी वर्मा ने सुनाया, तुम्हारी ही आहट पे अब हर नजर हो। अनुराधा ओस ने सुनाया, सबसे सुंदर बात मुझे तुमसे प्रेम है। डाॅ. सुधा सिंह ने सुनाया, - बड़ी मुश्किल से मिली आजादी इसे यूं न गंवाएंगे। इसके अतिरिक्त विवेक चौबे, गफ्फार नियाजी, रेखा चौरसिया, पूनम केशरी, ,हसन जौनपुरी,नंदलाल सिंह चंचल सहित अन्य ने काव्य रचना प्रस्तुत की। संचालन आनंद अमित और श्याम अचल ने किया। आनंद केसरी, राधा केशरी, हौसला प्रसाद मिश्र, सारिका चौरसिया, अश्क रज्जाकी, पूजा यादव थे।