नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने यहां सोमवार को कहा कि भारतीयों के डीएनए में मानवीय तत्व विद्यमान हैं। इसी कारण हमलों के बाद भी हमारी संस्कृति नष्ट नहीं हुई।
हमें ज्ञान के मंदिरों को दूकान न बनाकर इसे रोजगारी शिक्षा देने के केंद्र बनाने होंगे। सत्यार्थी ने देवपरवा में महराजी देवी मूलचंद महाविद्यालय का शिलान्यास किया।
इस दौरान नोबेल पुरस्कार विजेता ने कहा कि विंध्य और काशी की धरती में वह शक्ति है, जो लोगों को कर्म करने पर महान बना देती है।
इनकी मिट्टी में इतनी ऊर्जा है कि कोई मुख्यमंत्री से सीधे प्रधानमंत्री बन जाता है तो मेरे जैसे साधारण परिवार के व्यक्ति को इस क्षेत्र को कर्मस्थली बनाने पर विश्व का सबसे बड़ा पुरस्कार मिल जाता है।
नोबेल पुरस्कार विजेता ने भारत में शिक्षा के बाजारीकरण पर चिंता जताते हुए विद्यालयों को दूकान बनने से रोकने का संदेश दिया। कहा कि अपने ज्ञान को विस्तार दें।
विश्व में भारतीय विश्वविद्यालयों का कोई स्थान नहीं है, यह सोचनीय है, जबकि यहां तक्षशिला एवं नालंदा जैसे विश्वविद्यालय रहे हैं। कहा कि कई हमलों के बाद भी भारतीय संस्कृति नष्ट नहीं हो सकी, क्योंकि भारतीय डीएनए में मानवीय तत्व रचा-बसा है।
कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी ताकत ज्ञान की शक्ति है। पुरोहित का अर्थ बताया कि जो पास पड़ोस, देश और पूरे विश्व का हित सोचे, वही पुरोहित है। कहा कि जब बिल गेट्स ने कंप्यूटर का विंडो बनाया तो विश्व ज्ञान के प्रकाश से चमत्कृत हो गया है और बिल गेट्स देखते ही देखते दुनिया के सबसे अमीर आदमी बन गए।
साफ्टवेयर की दुनिया ज्ञान के आर्थिकीकरण पर टिकी है। इस मौके पर बेसिक शिक्षा एवं बाल विकास पुष्टाहार राज्यमंत्री कैलाश चौरसिया, पूर्व मंत्री राकेशधर त्रिपाठी, डा. चमनलाल, सुधाकर दूबे, डा. कैलाशपति त्रिपाठी, संजय कुमार, प्रभाकर, शंकर, रामाश्रय सुभाष चंद्र तिवारी, मुकेश, गिरिजा आदि मौजूद रहे।
इस अवसर पर क्षेत्र के अध्यापक राधेश्याम यादव एवं शिवशंकर को सम्मानित भी किया गया। संचालन रमाकांत दूबे ने किया। कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय के प्रबंधक गंगाधर दूबे ने किया।